अभी तक उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी जिले की चर्चा दो कारणों से होती रही है। एक गन्ना उत्पादन से और दूसरा किसान आंदोलन में किसानों और एक पत्रकार की हत्या की वजह से। इधर , किसानों ने ने केवल गन्ना के साथ केला की खेती का विस्तार किया है। केला का निर्यात करने की उपलब्धि भी हासिल की है।
लखीमपुर खीरी जिले में केला की खेती में धौरहरा के किसानों ने ज्यादा पैदावार वाली किस्म बोने में रुचि दिखाई है। किसानों को केले की खेती के लिए उद्यान विभाग की ओर से प्रति एकड़ 30 हजार प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलते हैं। जिला उद्यान अधिकारी मृत्युंजय सिंह ने बताया कि धौरहरा सहित जिले में किसानों को प्रति एकड़ अनुदान भी दिया जा रहा है।
मिली जानकारी अनुसार धौरहरा क्षेत्र में आने वाली केले की उन्नति प्रजाति असल में भारत और इस्राइल के कृषि समझौतों का ही नतीजा है। जलगांव, बंगलूरू और अहमदाबाद में इस्राइल के जी-9 टीसू कल्चर फॉर्मूले से तैयार पौध बड़े पैमाने पर प्रयोगशाला में तैयार कर अलग-अलग कंपनियों की मैनुफैक्चरिंग में किसानों तक पहुंचती हैं। इसके लिए किसानों को पौध की अग्रिम बुकिंग करानी होती है। एक प्रगतिशील किसान अजित मौर्या के अनुसार केले की पौध 16 से 20 रुपये में किसानों को मिलती है।
केला की खेती करने वाले किसानों के अनुसार एक एकड़ में 1250 केले के पौधे लगाए जाते हैं। फसल 15 से 20 महीने में तैयार हो जाती है। इस अवधि में किसानों को समय-समय पर खाद पानी के साथ आवश्यक दवाओं का छिड़काव करना होता है। इस फसल में किसानों की प्रति एकड़ करीब एक लाख रुपये लागत आती है। मुनाफा लगभग तीन गुना करीब तीन लाख का होता है।
धौरहरा के केला उत्पादक किसानों का कहना है कि इलाके में जब से जी-9 टिश्यू कल्चर केले की पौध आई है, तब से किसानों के दिन बदल गए हैं। धौरहरा क्षेत्र का केला राजधानी दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के लोगों को काफी पसंद आ रहा है। धौरहरा क्षेत्र से प्रतिदिन करीब सौ ट्रक केला इन राज्यों में जाता है।
वर्तमान में, राज्य में 68000 हेक्टेयर से अधिक केले की खेती है और हर साल 30 मीट्रिक टन से अधिक केले का उत्पादन होता है। केले के उत्पादन में लखीमपुर खीरी सबसे आगे है, जिसके बाद कुशीनगर, महाराजगंज, इलाहाबाद और कौशांबी का स्थान है। किसानों ने कहा कि, गन्ने के लिए उर्वरक की लागत लगभग 5,000 रुपये प्रति एकड़ है, केले के पौधे की खेती की लागत 15,000 रुपये प्रति वर्ष है लेकिन लाभ अधिक है।