गन्ना का भुगतान सही समय पर न मिलना, चीनी मिल, गन्ना विभाग के अधिकारियों द्वारा गन्ने की खेती से संबंधित समस्याओं का समय पर निस्तारण न करना, अधिकतर गन्ने की पर्चियां समय पर न मिलना, क्रय केंद्रों पर घटतौली, क्रय केंद्रों पर गन्ना माफिया का हावी होना, गन्ना तौलवाने के लिए लंबी प्रतीक्षा करना, गन्ना केंद्रों के प्रभारियों द्वारा अभद्र व्यवहार आदि समस्या की वजह से क्षेत्र में गन्ना किसानों ने दूसरी फसलों को बोने में दिलचस्पी दिखाई है। इसका असर चीनी मिलों पर पड़ने की आशंका हैं।
मिली जानकारी अनुसार जिले में जिन स्थानों के काफी किसानों ने गन्ने की खेती करना छोड़ दिया है , उनमें बीसलपुर नगर, बिलसंडा कस्बा, बरखेड़ा कस्बा, टिकरी, जोगीठेर, ज्योरह कल्याणपुर, रंभोजा, बमरोली, खनंका, करेली, घनश्यामपुर, कनपरा, कनपरी, मुड़िया बिलहरा, भदेंगकंजा, मसीत, परासी रामकिशन, परसिया, सिमरा, पिपरिया, दौलतपुर प्रमुख है।
गन्ना विभाग के अभिलेखों के अनुसार सहकारी गन्ना विकास समिति क्षेत्र में कुल 1, 07, 822 गन्ना किसान हैं। चालू गन्ना सत्र शुरू होने से पहले, जब समिति कर्मचारियों ने गन्ने की पर्चियां कराने के सिलसिले में गन्ने की खेती वाले किसानों का हिसाब लगाया, तो पता चला कि समिति क्षेत्र में केवल 59751 किसानों के खेतों में ही गन्ने की फसल खड़ी है। बाकी किसानों ने गन्ने की खेती के स्थान पर अन्य फसलें उगाई हैं। अब 59751 किसानों को ही गन्ने की पर्चियां जारी करने की कवायद शुरू की गई है।
मिली जानकारी अनुसार विभिन्न विसंगतियों के कारण इस समिति क्षेत्र के 48 हजार किसानों ने इस वर्ष गन्ने की खेती छोड़ दी है। इन किसानों ने गन्ने के स्थान पर अन्य फसलें की हैं।
पीलीभीत (उत्तर प्रदेश): भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने पूरनपुर तहसील क्षेत्र के उन किसानों के लिए मुआवजे की मांग की, जो मिल संचालन में देरी के कारण इस साल अपनी गन्ने की फसल समय पर नहीं काट सके। इससे गेहूं की फसल की बुआई प्रभावित हुई है।