केंद्र सरकार की एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) के तहत ऋण सीमा को मौजूदा ₹2 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ करने की योजना फिलहाल अधर में लटकी हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट में इस प्रस्ताव को जगह मिलेगी या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने इस प्रस्ताव पर कुछ आपत्तियां जताई हैं, जिसके बाद इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
यह अनिश्चितता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पिछले बजट में की गई तीन प्रमुख कृषि घोषणाएं अब तक लागू नहीं हो सकी हैं। मई 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया ₹1 लाख करोड़ का एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड देशभर में फार्म-गेट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के उद्देश्य से लाया गया था। इस योजना के तहत ₹2 करोड़ तक के ऋण पर अधिकतम सात वर्षों के लिए 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी दी जाती है। हालांकि, ₹2 करोड़ से अधिक की राशि पर यह सब्सिडी उपलब्ध नहीं है।
महंगाई के दबाव में बढ़ी लागत, लेकिन प्रस्ताव अटका
बढ़ती महंगाई के कारण इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की लागत में इजाफा हुआ है, जिसे देखते हुए सरकार के भीतर ऋण सीमा बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई। लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना के तहत ऋण सीमा नहीं बढ़ पाने के कारण AIF की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी फिलहाल टाल दिया गया है। एक सरकारी सूत्र के अनुसार, “जब KCC की सीमा नहीं बढ़ पाई, तो AIF का प्रस्ताव भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया, हालांकि बजट में इसके ऐलान की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।”
AIF का प्रदर्शन मजबूत
इन अड़चनों के बावजूद एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की प्रगति मजबूत रही है। बैंकों ने अब तक 1.5 लाख से अधिक परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिनमें 10,225 परियोजनाएं सहकारी बैंकों द्वारा स्वीकृत हैं। कुल मिलाकर ₹80,149 करोड़ के ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से ₹59,000 करोड़ की राशि 1,39,165 परियोजनाओं के लिए जारी की जा चुकी है। स्वीकृत परियोजनाओं की कुल लागत ₹1,27,385 करोड़ बताई जा रही है।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक परियोजनाएं मिली हैं। महाराष्ट्र में ₹29,990 करोड़, मध्य प्रदेश में ₹23,114 करोड़ और उत्तर प्रदेश में ₹22,120 करोड़ का निवेश हुआ है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
कृषि मंत्रालय के एक पूर्व अधिकारी का कहना है कि जो योजनाएं अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं, उन्हें प्रोत्साहन मिलना चाहिए। “AIF जैसी योजनाओं की क्रेडिट सीमा बढ़ेगी तो जमीनी स्तर पर गतिविधियां भी बढ़ेंगी। लेकिन घोषणाओं में देरी से सरकार की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है,” उन्होंने कहा।
KCC और अन्य घोषणाएं भी अधूरी
पिछले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने KCC के तहत ऋण सीमा ₹3 लाख से बढ़ाकर ₹5 लाख करने की घोषणा की थी, लेकिन यह अब तक लागू नहीं हो सकी है। फिलहाल छोटे किसान ₹3 लाख तक का फसल ऋण (जिसमें ₹1.6 लाख बिना गारंटी) प्रभावी 4 प्रतिशत ब्याज दर पर ले सकते हैं। 2025-26 के बजट अनुमान में कृषि ऋण पर ब्याज सब्सिडी के लिए ₹22,600 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा, कपास उत्पादकता मिशन और उच्च उपज वाले बीजों पर राष्ट्रीय मिशन जैसी घोषणाएं भी अभी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। ऐसे में AIF की ऋण सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी इन्हीं लंबित फैसलों की सूची में शामिल होता नजर आ रहा है।
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