नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (FCI) खाद्यान्न खरीद और वितरण कार्यों के लिए ₹50,000 करोड़ का अल्पकालिक ऋण जुटाने जा रहा है। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह ऋण अनुसूचित बैंकों से तीन महीने की अवधि के लिए लिया जाएगा। इसके साथ ही अतिरिक्त ₹25,000 करोड़ जुटाने का “ग्रीन शू ऑप्शन” भी रखा गया है।

अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में जमा किए गए टेंडर 22 मई को खोले जाएंगे। कुल उधारी किसी भी समय ₹75,000 करोड़ से अधिक नहीं होगी।

यह राशि खाद्यान्न की खरीद और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन के दौरान उत्पन्न नकदी प्रवाह असंतुलन को पूरा करने के लिए जुटाई जा रही है।

एफसीआई द्वारा लिया जाने वाला यह अल्पकालिक ऋण बिना किसी सुरक्षा (अनसिक्योर्ड) के होगा। खास बात यह है कि खाद्य ऋण के लिए उपलब्ध भारत सरकार की ₹6,000 करोड़ की गारंटी इन उधारियों पर लागू नहीं होगी।

टेंडर की शर्तों के अनुसार बैंकों की पेशकश 31 अगस्त तक वैध रहेगी और एफसीआई की जरूरत के अनुसार अलग-अलग चरणों में ऋण राशि जारी की जाएगी।

भारतीय खाद्य निगम केंद्र सरकार की प्रमुख एजेंसी है, जो किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खाद्यान्न खरीदने और राशन कार्ड धारकों व कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक खाद्यान्न पहुंचाने का कार्य करती है।

वर्तमान में देश में गेहूं खरीद का सीजन जारी है। 2026-27 विपणन सत्र (मार्च-अप्रैल) में अब तक एफसीआई और राज्य एजेंसियों ने मिलकर किसानों से 22.97 मिलियन टन गेहूं की खरीद की है।

राज्यों की बात करें तो पंजाब 10.51 मिलियन टन खरीद के साथ सबसे आगे है। इसके बाद मध्य प्रदेश में 6.72 मिलियन टन, हरियाणा में 2.58 मिलियन टन और राजस्थान में 1.77 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए कुल 34.49 मिलियन टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है।