खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के तहत भारतीय खाद्य निगम (FCI) द्वारा इस साल गेहूं की नीलामी समाप्त कर दी गई है। सरकार ने इस हफ्ते शुक्रवार को होने वाली साप्ताहिक नीलामी का नया टेंडर जारी नहीं किया। 4 दिसंबर 2024 से शुरू हुई साप्ताहिक ई-नीलामी के तहत एफसीआई ने कुल 3 मिलियन टन में से 2.97 मिलियन टन गेहूं बेचा है। वहीं, 2023-24 के दौरान लगभग 10 मिलियन टन गेहूं बेचा गया था। बिक्री की शुरुआत में हर हफ्ते 1 लाख टन गेहूं नीलामी के लिए पेश किया गया था। इसके बाद पेश गेहूं को बढ़ाकर 0.5 मिलियन टन किया गया। इस दौरान एक प्रोसेसर के लिए खरीद सीमा भी 100 टन से बढ़ाकर 400 टन कर दी गई थी।

बीती पांच मार्च को हुई आखिरी नीलामी में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, असम और हरियाणा में न्यूनतम बोली मूल्य में पिछले सप्ताह की तुलना में 10 से 150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल में अधिकतम बोली मूल्य में 10 से 58 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। गेहूं उत्पादक राज्यों में नीलामी की अधिकतम बोली 2,540 से 3,009 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में रही है। मध्य प्रदेश में यह 2,540 रुपये और उत्तराखंड में 3,009 रुपये प्रति क्विंटल थी। हालांकि जम्मू-कश्मीर में सबसे ऊंची बोली 3,275 रुपये प्रति क्विंटल रही। लेकिन पंजाब और हरियाणा में उच्च स्तर के मंडी कर और उपकर के कारण आटा मिलें राजस्थान समेत दूसरे राज्यों से अनाज की अपनी अधिकांश आवश्यकता प्राप्त करती हैं।

हरियाणा में एक हफ्ते के भीतर अधिकतम बोली मूल्य में 570 रुपये प्रति क्विंटल की भारी गिरावट आई और गेहूं की अधिकतम बोली 2,880 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गईं। पंजाब में यह गिरावट सिर्फ 50 रुपये रही और बोली 2,850 रुपये प्रति क्विंटल पर रही। बिहार में भी 15 रुपये प्रति क्विंटल की मामूली गिरावट दर्ज की गई और गेहूं की कीमत 2,953 रुपये प्रति क्विंटल रही। ,
बाजार में गेहूं की भारी मांग को देखते हुए सरकार ने कुछ मात्रा में कीमतों को नियंत्रित करने में सफलता पाई। बिजनेस लाइन की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों का हवाला देते हुए बताया कि इस साल पिछले साल की तुलना में गेहूं का स्टॉक सीमित था, इसलिए ज्यादा मात्रा में बिक्री नहीं हो सकी। इसके बाद भी नीलामी के पहले और आखिरी दौर के बीच गेहूं की कीमतों में 170 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। एफसीआई ने इस साल के लिए गेहूं का औसत आरक्षित मूल्य 2,464 रुपये प्रति क्विंटल रखा था, लेकिन गेहूं 2,800 रुपये प्रति क्विंटल पर बेचा गया। पहले दौर में औसत बिक्री मूल्य 2,885 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अंतिम दौर में घटकर 2,712 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। ,
वर्तमान में गेहूं उत्पादक राज्यों में कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ऊपर चल रही हैं। ऐसे में सरकारी खरीद चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि निजी व्यापारी भी अधिक मात्रा में गेहूं खरीद सकते हैं। सरकार को उम्मीद है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान द्वारा घोषित बोनस से गेहूं की सरकारी खरीद बढ़ेगी। इस साल सरकार ने 31 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। वहीं, पिछले साल गेहूं खरीद का लक्ष्य 37.3 मिलियन टन था। पिछले साल लक्ष्य से कम 26.61 मिलियन टन गेहूं खरीदा जा सका था। 2021-22 में रिकॉर्ड 43.34 मिलियन टन की खरीद के बाद से बीते तीन सालों से सरकारी खरीद लक्ष्य से कम रही है।