सरकारी मशीनरी और किसानों की तमाम कोशिशों के बावजूद देश में दलहन का उत्पादन ज़रूरत से भी कम हुआ। आबादी के हिसाब से बाहरी देशों से पहले दोगुना ज्यादा दालों को मंगाना पड़ा।अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 में दालों का आयात लगभग दोगुना हो गया और 3.74 अरब डॉलर पर पहुंच गया। हालांकि आधिकारिक आंकड़े अब भी आने बाकी हैं लेकिन शिपमेंट्स से पता चलता है कि करीब 45 लाख टन दाल का आयात किया गया। इससे पिछले साल यह आंकड़ा 24.5 लाख टन का था। दालों के आयात के लिए भारत नये बाज़ार तलाश रहा है। घरेलू बाजार में दलहन के मांग की पूर्ति और कीमतों को स्थिर रखने के लिए केंद्र ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे नए बाजारों के साथ दीर्घकालिक समझौते पर बातचीत कर रहा है। ब्राजील से 20,000 टन उड़द का आयात होना है जबकि अर्जेंटीना से अरहर के आयात के लिए बातचीत लगभग अंतिम पड़ाव पर है। सरकार ने दालों के आयात के लिए मोजाम्बिक, तंजानिया और म्यांमार से भी संपर्क किया है। हाल के दिनों में दालों के आयात में वृद्धि से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ेगी, जिससे कीमतें स्थिर सकतीं हैं। घरेलू बाजार की मांग को देखते हुए सरकार ने दालों के आयात के साथ जमाखोरी रोकने के लिए भी कड़े कदम उठाने का फैसला लिया है। चुनाव बीतने के बाद इस पर कदम उठाया जाएगा।सरकार ने पीले मटर के आयात को जून तक ड्यूटी फ्री कर दिया है। सरकार ने, अरहर और उड़द का आयात 31 मार्च 2025 तक कर- मुक्त कर दिया गया था। देश में आम चुनावों के खत्म होने तक सरकार के लिए दालों की कीमतें ना बढ़ें यह बड़ी चिंता का विषय है।
एक जानकारी के अनुसार पिछले दो से तीन वर्षों में दलहन का उत्पादन घटा है। कृषि मंत्रालय के अनुमानों के अनुसार इस साल दलहन का उत्पादन 234 लाख टन रह सकता है। पिछले साल 261 लाख टन दलहन का उत्पादन हुआ था।
देश में दलहन का उत्पादन बढ़ाने के लिए राज्य सरकारें योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रोत्साहित कर रही हैं। किसान नकदी की फसलों को लेकर उत्साहित हैं।