जलवायु परिवर्तन और अनियमित मानसून के दौर में धान की खेती किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो गई है। पारंपरिक धान रोपाई में जहां पानी और श्रम की अधिक खपत होती है, वहीं लागत भी बढ़ती है। ऐसे में सीधी बिजाई (DSR) विधि किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो रही है। यह तकनीक पानी और लागत दोनों की बचत करती है, लेकिन इसमें सबसे बड़ी चुनौती खरपतवार नियंत्रण की रहती है।
अब इस समस्या का समाधान निकल आया है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI-SARC) के वैज्ञानिकों ने एक विशेष ट्रैक्टर-चलित ड्राई और वेट लैंड वीडर तैयार किया है। यह मशीन धान के पौधों को नुकसान पहुंचाए बिना खरपतवार को जड़ से उखाड़ देती है।
कैसे काम करता है यह नया वीडर?
•इस ट्रैक्टर में पतले नैरो व्हील्स लगे हैं, जो धान की पंक्तियों के बीच आसानी से चलते हैं।
•धान की बुआई 25 सेंटीमीटर की दूरी पर करने पर यह और अधिक प्रभावी साबित होता है।
•यह मशीन कम नमी वाली जमीन में भी बेहतर काम करती है।
•एक घंटे में लगभग एक एकड़ खेत की निराई कर सकती है।
•इसका इस्तेमाल बुआई के 25–30 दिन बाद सबसे असरदार होता है।
किसानों के लिए फायदे
•खरपतवार नियंत्रण आसान और सटीक होगा।
•धान की पैदावार में 20-30% तक होने वाले नुकसान से बचाव होगा।
•समय और श्रम दोनों की बचत होगी।
•छोटे और मझोले किसान भी आसानी से इसका उपयोग कर पाएंगे।
•भविष्य में इस मशीन का उपयोग खाद छिड़काव के लिए भी किया जा सकेगा।
पूर्वांचल में सफल प्रदर्शन
हाल ही में वाराणसी के पनियारा गांव में इस मशीन का प्रदर्शन किया गया, जहां किसानों ने इसे हाथोंहाथ अपनाया। खरीफ सीजन 2025 में वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, गोरखपुर, देवरिया, महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में 500 एकड़ से अधिक क्षेत्र पर समूह प्रदर्शन की योजना बनाई गई है।