नई दिल्ली। भारत में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को लेकर तकनीक अब कोई चुनौती नहीं रह गई है, बल्कि सबसे बड़ी जरूरत स्पष्ट नीतियों, मजबूत सब्सिडी और तेज निर्णय प्रक्रिया की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और उद्योग जगत सही दिशा में कदम उठाएं, तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।
देश में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता साबित कर रहे हैं। कम ईंधन खर्च, कम रखरखाव लागत, ज्यादा कार्यक्षमता और बेहतर आय की संभावनाओं के कारण किसान इनकी ओर आकर्षित हो रहे हैं। आज का किसान केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक्स और विभिन्न औद्योगिक कार्यों से भी जुड़ चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक ट्रैक्टर अब केवल खेतों में उपयोग होने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों के लिए आय का प्रमुख व्यावसायिक साधन बन चुका है। गन्ना उद्योग, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), कचरा प्रबंधन और परिवहन जैसे क्षेत्रों में ट्रैक्टरों का उपयोग सालभर 10 से 16 घंटे तक किया जा रहा है। ऐसे में इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर किसानों की कमाई को और मजबूत बना सकते हैं।
इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें डीजल की तुलना में संचालन लागत काफी कम आती है। साथ ही बार-बार होने वाली मैकेनिकल खराबियों से भी राहत मिलती है। इससे किसानों को निश्चित और अनुमानित खर्च का फायदा मिलता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की वर्तमान नीतियां अब भी ट्रैक्टरों को केवल कृषि उपकरण के रूप में देखती हैं, जबकि वास्तविकता में वे ग्रामीण व्यवसाय और आय सृजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। जब तक नीति निर्माण में इस सोच में बदलाव नहीं होगा, तब तक इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों का बड़े स्तर पर विस्तार मुश्किल रहेगा।
भारत सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कई कदम उठा रही है, लेकिन दूसरी ओर डीजल आधारित ट्रैक्टरों पर सीमित प्रतिबंध होने के कारण स्वच्छ विकल्पों की ओर बदलाव की गति धीमी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों के लिए विशेष सब्सिडी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रामीण स्तर पर वित्तीय सहायता योजनाएं लागू की जाएं, तो भारत दुनिया के सबसे बड़े इलेक्ट्रिक कृषि वाहन बाजारों में शामिल हो सकता है।
जानकारों का कहना है कि जब आर्थिक लाभ स्पष्ट होंगे और नीति का समर्थन मजबूत होगा, तब इलेक्ट्रिक ट्रैक्टरों को अपनाने के लिए अलग से अभियान चलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए सबसे व्यवहारिक और लाभकारी विकल्प बन जाएगा।