लुधियाना:पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) के इंटर-कॉलेज यूथ फेस्टिवल का समापन हंसी-ठिठोली और तीखे व्यंग्य के साथ हुआ, जहां छात्रों ने पारंपरिक पंजाबी हास्य कला ‘भांड’ के माध्यम से राज्य की सामाजिक-राजनीतिक हकीकतों पर करारा प्रहार किया।

कृषि कॉलेज और कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी सहित पाँच कॉलेजों के प्रतिभागियों ने सरकार के कामकाज, राज्य की वित्तीय स्थिति, एनजीओ की भूमिका और हालिया पंजाब बाढ़ को लेकर तीखे, लेकिन मनोरंजक व्यंग्य प्रस्तुत किए।

व्लॉगिंग और वित्तीय संकट बने मुख्य निशाना

छात्र कलाकारों ने हाल की बाढ़ के दौरान दिखी “इन्फ्लुएंसर कल्चर” पर जोरदार कटाक्ष किया। एक लोकप्रिय स्किट में उन कंटेंट क्रिएटर्स की खिल्ली उड़ाई गई जो राहत देने से अधिक वीडियो शूट करने में रुचि रखते थे। मंच पर एक अभिनेता ने पूछा—“सरकार ने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्या किया?”, तो दूसरा तुरंत जवाब देता है कि जैसे ही पानी उतरा, वैसे ही इन्फ्लुएंसर भी गायब हो गए, मानो बाढ़ उनके लिए सिर्फ “कंटेंट का मौका” थी।

राज्य की खराब वित्तीय स्थिति पर एक व्यंग्यात्मक नाटक में तीन भाइयों—एक शिक्षक, एक डॉक्टर और एक चोर—की कहानी दिखाई गई। punchline यह थी कि चोर सबसे अमीर है क्योंकि सरकारी कर्मचारी (शिक्षक और डॉक्टर) तो समय पर वेतन तक नहीं पा रहे। भ्रष्टाचार पर भी तंज कसते हुए एक कलाकार ने कहा कि उनके घर छापेमारी हुई, जिस पर साथी कलाकार ने चुटकी ली—“इतना बड़ा दर्जा अभी नहीं मिला, ये तो सिर्फ बड़े अधिकारियों के लिए होता है,”—जो हालिया भ्रष्टाचार मामलों की ओर इशारा था।

सीमा पार राजनीति पर भी तंज

व्यंग्यकारों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी हास्य भरी टिप्पणी की और एक विदेशी राजनीतिक नेता की तुलना गांव के सरपंच से की, जो दो पक्षों की लड़ाई निपटाने का प्रयास करता है।

कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ भावनात्मक स्पर्श भी देखने को मिला। दो समूहों ने प्रसिद्ध पंजाबी कवि सुरजीत पातर की रचना “लੱਗी नज़र पंजाब नूं, कोई नज़र उतारो…” की पंक्तियाँ गाकर माहौल को संजीदा बना दिया।

फेस्टिवल ने छात्रों की रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और हास्य को एक मंच पर एकत्र किया, जिसमें दर्शकों ने भरपूर आनंद लिया।