खनौरी – शम्भू बार्डर पर अनशनकारी किसानों को गिरफ्तार करके किसानों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 और 170 के तहत केस दर्ज किया गया है। धारा 126 के तहत किसी व्यक्ति को जबरन किसी स्थान पर जाने से रोकना दंडनीय अपराध है, जबकि धारा 170 पुलिस को ऐसे व्यक्तियों को बिना वारंट गिरफ्तार करने की अनुमति देती है, जिन पर संज्ञेय अपराध की योजना बनाने का संदेह हो।
प्रशासन का कहना है कि कई किसान सरकार का समर्थन करने को तैयार हैं और जल्द ही शंभू बॉर्डर को पूरी तरह से खाली करवा दिया जाएगा।
पुलिस प्रशासन ने शंभू बॉर्डर से जब्त किए गए ट्रैक्टर-ट्रालियों, एलईडी, पंखे, एसी, कूलर और अन्य सामान को पुराने शंभू थाने में बनाए गए एक यार्ड में रखने का निर्णय लिया है। किसान अपनी संपत्ति का प्रमाण दिखाकर वहां से अपना सामान ले सकेंगे। एसएसपी ने कहा कि प्रशासन किसानों के साथ टकराव नहीं चाहता और उनकी समस्याओं को हल करने के लिए बातचीत जारी है।
शंभू बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे 100 किसानों को पुलिस ने हिरासत में लेकर पटियाला सेंट्रल जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए किसानों में प्रमुख किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, काका सिंह कोटड़ा, अभिमन्यु कोहाड़ और सुखजीत सिंह हरदोझंडे भी शामिल हैं। पटियाला के एसएसपी डॉ. नानक सिंह ने बताया कि शंभू बॉर्डर पर करीब 500 ट्रैक्टर-ट्रालियां मौजूद थीं, जिनमें से 100 को हटा दिया गया है। बाकी ट्रैक्टर-ट्रालियों और अन्य निर्माणों को भी शुक्रवार शाम तक पूरी तरह से हटाने की योजना है।
मिली जानकारी अनुसार इस पंजाब पुलिस ने किसान नेता सरवण सिंह पंधेर समेत 100 किसानों पर केस दर्ज कर उन्हें पटियाला जेल भेज दिया है। प्रदेश भर में लगभग एक हजार से ज्यादा किसान अभी भी पुलिस हिरासत में हैं। मोगा, बठिंडा, मुक्तसर, फरीदकोट और होशियारपुर में सरकार की कार्रवाई से नाराज किसान जत्थेबंदियों और पुलिस के बीच टकराव भी देखने को मिला। किसान संगठनों ने 26 मार्च को चंडीगढ़ कूच की घोषणा की है।
शंभू और खनौरी बॉर्डर से किसानों का धरना खत्म करने के बाद पंजाब सरकार ने भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के नेताओं को शुक्रवार को बैठक के लिए बुलाया था। लेकिन भारतीय किसान यूनियन एकता के नेता जोगिंदर सिंह उगराहां ने चंडीगढ़ में होने वाली बैठक में आने से इंकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि 19 मार्च को सरकार की जिस तरह की कार्रवाई रही है, उसे देखते हुए सरकार पर विश्वास नहीं किया जा सकता। उन्होंने संयुक्त किसान मोर्चा से भी अपील की है कि वह भी इस इस बैठक में हिस्सा न लें। उन्होंने कहा कि सीएम मान को खुद बैठक में बैठना चाहिए और जहां उनकी बात समाप्त हुई थी, वहां से दोबारा शुरू की जानी चाहिए। 26 मार्च को चंडीगढ़ विधानसभा कूच के लिए किसान तैयार हैं। उन्होंने प्रदर्शन के लिए जगह देने की मांग की है।
कुरुक्षेत्र में बड़ी संख्या में संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के सदस्य सड़क पर उतर आए। एसकेएम के आह्वान पर किसानों व विभिन्न संगठनों के सदस्यों ने सेक्टर दो ताऊ देवीलाल पार्क में बैठक की। इसके बाद किसान नेता रतन मान व सुरेश कौथ के नेतृत्व में जुलूस निकालते हुए सीएम आवास पर पहुंचे।
जहां करीब दो घंटे तक मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा। किसानों व अन्य संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का पुतला भी जलाया। विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहेगा।
सीएम आवास पर प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने पंजाब में गिरफ्तार किसान नेताओं को तुरंत रिहा करने की मांग की और कहा, केंद्र सरकार द्वारा 25 नवंबर 2024 को जारी की गई कृषि विपणन राष्ट्रीय नीति को लेकर हरियाणा विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर वापस किया जाए। इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने बिजली कानून और स्मार्ट मीटर योजना को रद्द करने, आईएमटी रोजकमेव में किसानों की जमीनों का अधिग्रहण के संबंध में पूरा मुआवजा देने, प्रदेश के कई जिलों से गुजरने वाले हाईटेंशन लाइनों में किसानों को उनकी मांगों के अनुरूप उचित मुआवजा दिए जाने, जबरन लाइन दबाने के काम पर रोक लगाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश अनुसार खरीद की कानूनी गारंटी दिए जाने की मांग की गई।
प्रदर्शनकारियों ने किसान आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को रद्द करने, कृषि और किसानों व मजदूरों का सशक्तीकरण किए जाने, खरीफ 2024 में सूखा राहत कोष के जिन किसानों को पैसे नहीं मिले उनके जल्द जारी किए जाने, पराली प्रबंधन और डीएसआर से धान लगाने की सहायता राशि जारी करने, पिछले फसल खराबे के मुआवजे और लंबित बीमा क्लेम जारी करने, किसान मजदूरों को कर्ज मुक्त किया करने, बिजली के लंबित ट्यूबवेल कनेक्शन जारी करने, सहकारी सोसाइटियों में किसानों के नए खाते खोलने व कृषि ऋण उपलब्ध करवाने की भी मांग की गई। उन्होंने कहा कि अगर लंबित मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।