Soluble Fertilizer Industry Association (एसएफआईए) ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और अकादमिक समुदाय के छात्रों के लिए रिसर्च कॉन्टेस्ट के दूसरे संस्करण की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य पौध पोषण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास को गति देना है।
एसएफआईए की ओर से जारी मीडिया बयान के अनुसार, यह रिसर्च कॉन्टेस्ट प्लांट न्यूट्रिशन और स्पेशियलिटी एग्री-इनपुट्स से जुड़े विभिन्न विषयों को कवर करेगा। प्रतियोगिता के तहत SOMS (सॉल्युबल फर्टिलाइजर, ऑर्गेनिक एवं बायो-फर्टिलाइजर, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, मृदा सुधारक और स्टिमुलेंट) आधारित उर्वरकों पर शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। इसमें संपूर्ण पोषक तत्व प्रबंधन पैकेज के रूप में SOMS उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ घुलनशील उर्वरकों, जैविक उर्वरकों, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स, बायो-स्टिमुलेंट्स और एकीकृत एग्री-इनपुट समाधानों के संयुक्त उपयोग पर भी अध्ययन शामिल होगा।
प्रतियोगिता के तहत SOMS एग्री-इनपुट्स से जुड़े विनिर्माण प्रक्रियाओं और तकनीकी प्रगति पर शोध को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। इसका मुख्य फोकस उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और बड़े पैमाने पर उपयोग की संभावनाओं को बेहतर बनाना होगा। इसके अलावा गुणवत्ता नियंत्रण, मानकीकरण और नियामकीय अनुपालन को मजबूत करने के लिए परीक्षण पद्धतियों के विकास और सत्यापन पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।
मृदा स्वास्थ्य से जुड़े शोध भी इस प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे। विशेष रूप से मिट्टी के pH प्रबंधन, क्षारीयता सुधार और कठिन परिस्थितियों वाली मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने पर अनुसंधान को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही SOMS एग्री-इनपुट्स और पारंपरिक सब्सिडी वाले उर्वरकों के तुलनात्मक अध्ययन को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें कृषि दक्षता, फसल प्रतिक्रिया, मिट्टी पर प्रभाव, पोषक तत्व उपयोग दक्षता और आर्थिक व्यवहार्यता का मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रतियोगिता का ग्रैंड फिनाले ‘थीसिस शोडाउन’ के रूप में Speciality Fertilizer Summit – SOMS 2026 के दौरान 2 जुलाई को Ahmedabad में आयोजित होगा। इस सम्मेलन में दुनियाभर से उद्योग जगत के प्रतिनिधि, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ शामिल होंगे। फाइनलिस्ट को अपने शोध को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
यह मंच Indian Institutes of Technology (आईआईटी), Indian Council of Agricultural Research (आईसीएआर), National Research Centre (एनआरसी) और अन्य तकनीकी संस्थानों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगा। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन, डिजिटल एग्रीकल्चर और अगली पीढ़ी की एग्री-टेक तकनीकों पर काम कर रहे शोधकर्ताओं को इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
एसएफआईए के अनुसार, पिछले ‘थीसिस शोडाउन’ में वेस्टवॉटर से अमोनिया रिकवरी कर उसे घुलनशील उर्वरक के रूप में उपयोग करने तथा कृषि स्प्रेइंग सिस्टम में रोबोटिक्स के इस्तेमाल जैसे अभिनव शोध सामने आए थे। संस्था ने बताया कि इस बार भी शीर्ष तीन शोध प्रस्तुतियों को कृषि विज्ञान और नवाचार में योगदान के लिए नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।