मौसम में लगातार बदलाव और कभी भी मूसलाधार बरसात होने से भारत के अन्य जिलों की तरह उत्तर प्रदेश में अप्रैल और मई के बाद जून में भी ओलावृष्टि और आंधी-तूफान आ रहे हैं। मूसलाधार बारिश के साथ नदियों का जलस्तर भी बढ़ रहा है।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की दृष्टि से 24 अति संवेदनशील जिलों पर भी सीएम योगी की नजर है। इन जिलों में महाराजगंज, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, गोरखपुर, बस्ती, बहराइच, बिजनौर, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर, गोंडा, बलिया, देवरिया, सीतापुर, बलरामपुर, अयोध्या, मऊ, फर्रुखाबाद, श्रावस्ती, बदायूं, अंबेडकर नगर, आजमगढ़, संतकबीर नगर, पीलीभीत और बाराबंकी हैं।

दूसरी ओर सहारनपुर, शामली, अलीगढ़, बरेली, हमीरपुर, गौतमबुद्ध नगर, रामपुर, प्रयागराज, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, हरदोई, वाराणसी, उन्नाव, लखनऊ, शाहजहांपुर व कासगंज समेत 16 जिले संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में बाढ़ की आपात स्थिति हेतु पर्याप्त रिजर्व स्टॉक इकट्ठा करने का निर्देश सीएम ने दिया है। इन स्थलों पर प्रकाश व आवश्यक उपकरणों का भी प्रबंध किया जा रहा है। सभी 780 बाढ़ सुरक्षा समितियां गठित कर ली गई हैं। अति संवेदनशील तथा संवेदनशील तटबंधों का जिलाधिकारी निरीक्षण कर इसे दुरुस्त भी करा रहे हैं।

बाढ़ से निपटने के लिए योगी सरकार ने सारी व्यवस्था पहले ही कर ली है। लखनऊ में केंद्रीय व 50 जनपदों में बाढ़ नियंत्रण कक्षों की स्थापना हो चुकी है। 15 जून से यह सतत क्रियाशील हो जाएंगे। आमजन की सुरक्षा को शीर्ष पर रखते हुए 2022-23 में इससे जुड़ीं 282 परियोजनाएं और योगी सरकार के कार्यकाल में कुल 982 बाढ़ परियोजनाएं पूरी की गईं। वर्तमान में 265 नई परियोजनाएं, 07 ड्रेजिंग संबंधी परियोजना और पूर्व से संचालित 140 परियोजनाओं सहित कुल 412 परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। 325 से अधिक परियोजनाओं का 50फीसदी कार्य पूरा हो चुका है।

उत्तर प्रदेश पुलिस रेडियो मुख्यालय लखनऊ द्वारा बाढ़ सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान हेतु महत्वपूर्ण 113 बेतार केंद्र भी बाढ़ अवधि में सतत क्रियाशील रहेंगे।