भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति के तहत पहले फेज में राशि को आवंटन को हरी झंडी मिल गयी है| प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य है कि रासायनिक खाद का बहिष्कार किया जाए| इसके लिए जिले में चार क्लस्टर के तहत चिह्नित किसानों को अनुदान मिलेगा|

गाय के गोबर व अन्य विधि से जिले में नेचुरल फार्मिंग की कवायद तेज हो गयी है| परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति से जिले में चार हजार हेक्टेयर को चिह्नित किया गया है| वहीं चार कलस्टर का निर्माण हुआ है. इससे जुड़े चिह्नित किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए अनुदान दिया जायेगा|

किसानों के लिए जीरो बजट पर लागू इस योजना के लिए वर्ष 2022-23 के लिए राशि खर्च करने की हरी झंडी मिल गयी है| बताया गया है कि रासायनिक खाद का बहिष्कार करना योजना का उद्देश्य है|

प्राकृतिक कृषि पद्धति के लिए 17 जिलों में 31 हजार हेक्टेयर में योजना का टारगेट तय किया गया है| इसमें मुजफ्फरपुर जिले को भी शामिल किया गया है| 60 फीसदी केंद्र व 40 फीसदी राज्य की राशि पर योजना संचालित होनी है| जिला कृषि पदाधिकारी खुद योजना की मॉनीटरिंग करेंगे| कृषि विभाग के विशेष सचिव रवींद्र नाथ राय ने संबंधित जिला कृषि पदाधिकारी को गाइडलाइन भेजी है|

गाइडलाइन में स्पष्ट है – प्रत्येक कलस्टर में कुल लाभान्वित किसनों की संख्या में कम से कम 65 फीसदी किसान लघु व सीमांत श्रेणी के होंगे| साथ ही महिला कृषकों को प्राथमिकता दी जायेगी| किसानों को प्रति हेक्टेयर सहायता अनुदान प्रथम वर्ष दो हजार रुपये दिये जायेंगे| वहीं कलस्टर निर्माण, क्षमतावर्द्धन सहित अन्य कार्यों के लिए प्रति हेक्टेयर 12,200 राशि का प्रावधान तीन वर्षों के लिए किया गया है| पहले वर्ष के लिए जिले को 2 करोड़ 11 लाख रुपये मुहैया कराया गया है|