भारत और अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (International Fund for Agricultural Development-IFAD) के बीच ग्रामीण विकास और जलवायु अनुकूल कृषि को लेकर साझेदारी का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। IFAD के वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे के दौरान अगले आठ वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप पर चर्चा की, जिसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, छोटे किसानों की आय बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए टिकाऊ कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना है।
IFAD के एसोसिएट वाइस-प्रेसिडेंट Donal Brown के नेतृत्व में आए प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्रालय, कृषि मंत्रालय और ग्रामीण विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इन बैठकों में ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने, कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और किसानों की आजीविका को सशक्त बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रतिनिधिमंडल में एशिया और प्रशांत क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक Reehana Raza और भारत के कंट्री डायरेक्टर Marc de Sousa-Shields भी शामिल थे।
आठ वर्षीय रोडमैप पर फोकस
IFAD के अनुसार नया रोडमैप सह-वित्तपोषण बढ़ाने, नवाचार को जोखिम मुक्त बनाने और सफल मॉडलों को भारत की नीतियों एवं संस्थागत ढांचे में शामिल करने पर आधारित होगा। इस योजना में स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और सहकारी समितियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो किसानों को वित्त, तकनीक, बाजार और बुनियादी ढांचे से जोड़ने का काम करेंगी।
कृषि सचिव Atish Chandra के साथ हुई चर्चा में दालों और तिलहनों में आत्मनिर्भरता, छोटे किसानों के लिए संसाधनों के बेहतर उपयोग, दूरदराज क्षेत्रों में डिजिटल कृषि और मोटे अनाज (मिलेट्स) जैसी जलवायु अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने पर विचार किया गया।
वहीं ग्रामीण विकास सचिव Rohit Kansal के साथ ग्रामीण समृद्धि एवं लचीलापन कार्यक्रम तथा स्मार्ट विलेज जैसी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
मेघालय और असम परियोजनाओं का दौरा
प्रतिनिधिमंडल ने Meghalaya के री-भोई जिले का दौरा कर IFAD समर्थित “मेघा-लैम्प” परियोजना के तहत चल रहे सामुदायिक विकास कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान किसान समूहों, प्रसंस्करण इकाइयों और स्थानीय संस्थाओं के साथ बातचीत की गई।
डोनाल ब्राउन ने मेघालय के मुख्यमंत्री Conrad Sangma से मुलाकात कर भविष्य की साझेदारी पर चर्चा की। इसके अलावा Assam के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma के साथ भी कृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने वाली नई परियोजना पर विचार-विमर्श हुआ।
रीहाना रज़ा ने कहा कि IFAD पिछले दो दशकों से मेघालय के साथ काम कर रहा है और छोटे किसानों व ग्रामीण समुदायों के सतत विकास के लिए दीर्घकालिक साझेदारी बेहद आवश्यक है।
भारत IFAD के सबसे बड़े साझेदारों में शामिल
भारत, IFAD का संस्थापक सदस्य है और पिछले 48 वर्षों से संगठन के साथ मिलकर ग्रामीण विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है। वर्तमान में IFAD देशभर में 35 ग्रामीण विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है, जिनका कुल पोर्टफोलियो लगभग 4.2 अरब अमेरिकी डॉलर का है। इसके साथ ही भारत IFAD के सबसे बड़े वैश्विक साझेदार देशों में शामिल हो गया है।