देश के प्रमुख 161 जलाशयों में जल संग्रहण क्षमता 90 प्रतिशत से नीचे आ गया है, क्योंकि पूर्वोत्तर मानसून के चलते हो रही बारिश में अंतराल आ गया है। सेंट्रल वॉटर कमीशन (CWC) द्वारा जारी नवीनतम डेटा के अनुसार, पश्चिमी और मध्य भारत में जलाशयों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जहां पानी का स्तर 90% से अधिक है।

हालांकि, उत्तर, पूर्व और दक्षिण के जलाशयों में जल स्तर सामान्य से कम पाया गया है, जिससे जल प्रबंधन और रबी फसलों की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

CWC की साप्ताहिक बुलेटिन के अनुसार, प्रमुख जलाशयों में कुल संग्रहण 182.479 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) की क्षमता के मुकाबले 88.68 प्रतिशत, यानी 161.820 BCM दर्ज किया गया है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि:

  • यह स्तर पिछले वर्ष की तुलना में 6.5% अधिक है।

  • और पिछले 10 वर्षों के औसत से 20 प्रतिशत अंक अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगले दो हफ्तों में पूर्वोत्तर मानसून की सक्रियता जलाशयों में पानी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी। यदि बारिश में और देरी होती है, तो दक्षिण भारत के राज्यों—तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश—में जल संकट के हालात उत्पन्न हो सकते हैं, क्योंकि ये क्षेत्र रबी सीजन में काफी हद तक इन जलाशयों पर निर्भर रहते हैं।

साथ ही उत्तर भारत में भी ठंड बढ़ने के साथ जल की मांग में विस्तार देखने को मिल सकता है। ऐसे में जल संरक्षण और कुशल जल प्रबंधन की आवश्यकता और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है।