पश्चिम बंगाल अनानास उत्पादन में पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर है। राज्य देश के कुल अनानास उत्पादन का 17% से अधिक योगदान देता है। यहां की उपजाऊ मिट्टी, आर्द्र जलवायु और आधुनिक खेती पद्धतियां इसकी प्रमुख वजह हैं। जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और दार्जिलिंग जिलों में बड़े पैमाने पर अनानास की खेती होती है। विशेष रूप से यहां की “क्वीन” किस्म अपनी सुगंध और स्वाद के लिए जानी जाती है।
कृषि मंत्रालय (2023-24) के आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल हर साल 4.5 लाख टन से ज्यादा अनानास का उत्पादन करता है। उत्तर बंगाल का उष्णकटिबंधीय वातावरण इस फल की खेती के लिए आदर्श माना जाता है। मई से जुलाई के बीच यहां अनानास की कटाई होती है। यह छोटे और सीमांत किसानों के लिए आय का एक प्रमुख साधन बन गया है।
भारत में अनानास उत्पादन के शीर्ष 5 राज्य (सालाना उत्पादन):
 पश्चिम बंगाल – 4.5 लाख टन से अधिक
 असम – 4 लाख टन से अधिक
 केरल – 3.7 लाख टन
 कर्नाटक – 2.6 लाख टन
 बिहार – 1.5 लाख टन से अधिक
अन्य राज्यों की स्थिति:
•असम: दर्रांग और नगांव जिले अनानास के बड़े उत्पादक हैं। यहां की उच्च वर्षा और अम्लीय मिट्टी खेती के लिए उपयुक्त है।
•केरल: एर्नाकुलम जिले का वाझक्कुलम “अनानास नगरी” के रूप में प्रसिद्ध है। यहां की ‘केव’ किस्म को GI टैग मिला है।
•कर्नाटक: कोडगु और उडुपी में अनानास की खेती सुपारी और नारियल के साथ अंतरफसल के रूप में होती है।
•बिहार: कटिहार और पूर्णिया जिलों में अनानास का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है।
रोचक तथ्य:
 भारत दुनिया के शीर्ष 5 अनानास उत्पादक देशों में शामिल है।
 ‘क्वीन’ और ‘केव’ किस्में भारतीय बाजार में सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।
 वाझक्कुलम अनानास को भौगोलिक संकेत (GI टैग) प्राप्त है।
 भारत में अनानास मुख्य रूप से खरीफ फसल के रूप में उगाया जाता है।
 त्रिपुरा और मेघालय में यह आदिवासी समुदायों के लिए आजीविका का बड़ा साधन है।