सूबे में में शुरु होने जा रही परियोजनाओं से कई गांवों की तस्वीर बदलने जा रही है। ये योजनाएं केन-बेतवा लिंक परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना हैं। इन दोनों परियोजनाओं के चलते प्रदेश के 23 जिलों के 4422 गांवों में बड़ा बदलाव होगा। जहां आर्थिक स्थिति बेहतर हो जाएगी।
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश के 10 जिलों छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा और सागर के किसानों को बड़ा फायदा होगा। जिससे 44 लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। साथ उत्तर प्रदेश के 21 लाख आबादी को पानी की सुविधा मिलेगी।
पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी लिंक परियोजना से मालवा और चंबल की तस्वीर बदल जाएगी। जिससे आर्थिक क्षेत्र में बड़ा फायदा होगा। प्रदेश के 13 जिलों गुना, मुरैना, शिवपुरी, भिंड, श्योपुर, उज्जैन, सीहोर, मंदसौर, इंदौर, धार, आगर मालवा, शाजापुर और राजगढ़ जिलों के 3217 गांवों इस परियोजना का बड़ा फायदा होगा। जिससे सिंचाई के लिए पानी भी मिलेगा। पार्वती कालीसिंध परियोजना से गुना के 637, मुरैना के 635, शिवपुरी के 470, भिंड के 440, श्योपुर के 278, उज्जैन के 238, सीहोर के 110, मंदसौर के 147, इंदौर के 75, देवास के 74, आगर मालवा के 73, शाजापुर के 21 और राजगढ़ के 19 गांव शामिल हैं। इस परियोजना में सबसे ज्यादा गुना के गांव शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी अनुसार केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत 221 किलोमीटर लंबी नहर बनाई जाएगी। जिसमें दो किलोमीटर की सुरंग भी होगी। जिससे सूखे पड़े चार हजार तालाबों में पानी आ जाएगा। साथ ही छतरपुर जिले 3 लाख 11 हजार 151 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई होगी।
एक अन्य जानकारी अनुसार केंद्र सरकार द्वारा बनाए जा रहे दिल्ली-मुबंई एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। जिसका 247 किलोमीटर का हिस्सा एमपी के मंदसौर, रतलाम और झाबुआ जिले से होकर गुजरता है। अच्छी कनेक्टिविटी के लिए उज्जैन-जावरा के बीच 102 किलोमीटर के सिक्स लेन ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। जो कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात से जाकर सीधा जुड़ेगा।