जूना अखाड़े के बाद सबसे ताकतवर माने जाने वाले इस अखाड़े में नागा साधु भी उच्च शिक्षा प्राप्त हैं। ज्ञान, भक्ति और वैराग्य की त्रिवेणी के रूप में प्रवाहमान पंचायती अखाड़ा निरंजनी सनातन संस्कृति की पताका के रूप में फहराता रहा है। यह पहला अखाड़ा है जिसमें डॉक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर भी नागा की दीक्षा लेकर जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस अखाड़े का पूरा नाम श्री पंचायती तपोनिधि निरंजन अखाड़ा है। इसका मुख्यालय मायापुर हरिद्वार में स्थित है। अगर साधुओं की संख्या की बात की जाए तो निरंजनी अखाड़ा देश के सबसे बड़े और प्रमुख अखाड़ों में है। जूना अखाड़े के बाद इसे सबसे ताकतवर अखाड़ा माना जाता है। यह देश के 13 प्रमुख अखाड़ों में एक है।
मिली जानकारी अनुसार इस अखाड़े में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे साधु हैं। इसमें डॉक्टर, प्रोफेसर, इंजीनियर शामिल हैं। वृंदावन के आश्रम में रहने वाले निरंजनी अखाड़े के आदित्यानंद गिरि एमबीबीएस डिग्रीधारी हैं। जबकि इस अखाड़े के सचिव ओंकार गिरि इंजीनियर हैं। उन्होंने एमटेक किया है।
इसी तरह महंत रामरत्न गिरि दिल्ली स्थित डीडीए में सहायक अभियंता के पद पर काम कर चुके हैं। डॉ. राजेश पुरी ने पीएचडी की उपाधि हासिल की है तो महंत रामानंद पुरी अधिवक्ता है। निरंजनी अखाड़े के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी बताते हैं कि शैव परंपरा के इस अखाड़े के करीब 70 फीसदी साधु-संतों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की है।
इस अखाड़े में संन्यास की दीक्षा योग्यता के आधार पर ही प्रदान की जाती है। इसमें संस्कृत के विद्वान और आचार्य भी हैं। निरंजनी अखाड़े की हमेशा एक अलग छवि रही है। सचिव ओंकार गिरि बताते हैं कि इस अखाड़े का गठन सनातन धर्म की रक्षा के लिए किया गया था।
