राजस्थान सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में प्लास्टिक के फैलाव और कूड़ा कर्कट रोकने के उद्देश्य से बर्तन बैंक बनाने का फैसला किया है। पहले चरण में एक हजार ग्राम जोड़े जाएंगे। बर्तन बैंक के गठन और‌ संचालन की गाइड लाइन जारी कर दी गई है।

गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए इस पहल में बहुत कम किराए पर बर्तन जरूरतमंद परिवारों को देना तय किया गया है। इसका लाभ गरीब परिवारों को भी होगा। इन बर्तनों का उपयोग गांव में शादी-ब्याह या किसी परिवार के आयोजनों या सामुदायिक कार्यक्रमों या पंचायत स्तर पर होने वाले प्रशिक्षणों में किया जाएगा, ताकि ऐसे कार्यक्रमों में प्लास्टिक की पत्तलों के उपयोग को रोका जा सके और गांवों को प्लास्टिक मुक्त बनाया जा सके।

जारी गाइड लाइन के अनुसार, एक सेट में एक थाली, तीन कटोरी, एक चम्मच और एक गिलास होगा। हर पंचायत में न्यूनतम चार सौ ऐसे सेट खरीदे जाएंगे। हर बर्तन पर संबंधित पंचायत का नाम और स्वच्छ भारत मिशन छपवाया जाएगा। बर्तन पांच वर्ष बाद बदले जा सकेंगे, जो बर्तन अच्छी स्थिति में होंगे, उन्हें आगे भी काम में लाया जा सकेगा। बर्तनों की न्यूनतम संख्या बनाए रखने के लिए पंचायत समय-समय पर बर्तन खरीदेगी।

राजस्थान सरकार की इस अनूठी पहल के तहत यह बैंक बर्तनों का होगा। इन बर्तनों का‌ उपयोग गांव में किसी आयोजन या सामुदायिक कार्यक्रमों में किया जाएगा। इसका किराया भी मात्र 3 रुपए प्रति बर्तन सेट रखा गया है। गौरतलब है कि सरकार की ओर से प्रदेश की लगभग 1000 से ज्यादा पंचायतों में बर्तन बैंक बनाने की घोषणा बजट में ही की गई थी है। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप अब इसकी गाइड लाइन भी जारी कर दी गई है।

मिली जानकारी अनुसार पहले चरण में प्रदेश के एक हजार गांवों सहित भरतपुर के 21 और डीग जिले के 15 पंचायतों में बर्तन बैंक बनाए जाएंगे और इसके लिए इन पंचायतों को एक-एक लाख रुपए की राशि दी जाएगी। राज्य सरकार ने इस बार के बजट में पंचायतों को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए बर्तन बैंक बनाने की घोषणा की थी