मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि यदि उत्तर प्रदेश एक विकसित राज्य बनता है, तो भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने से कोई ताकत नहीं रोक सकती। यह लक्ष्य “विकसित भारत @2047” विज़न का मूल आधार है।
मुख्यमंत्री लखनऊ में उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (UPCAR) के 36वें स्थापना दिवस पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विकसित कृषि–विकसित उत्तर प्रदेश @2047’ का उद्घाटन कर रहे थे।
कृषि होगी विकास की रीढ़
योगी आदित्यनाथ ने कहा, “प्रकृति और ईश्वर ने उत्तर प्रदेश को उपजाऊ सिंचित भूमि और अनुकूल जलवायु का वरदान दिया है। लेकिन इसका पूरा लाभ उठाने के लिए हमें अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक तकनीकों में निवेश करना होगा।”
उन्होंने कहा कि राज्य कृषि उत्पादन को तीन गुना तक बढ़ाने की क्षमता रखता है। इसके लिए वैज्ञानिक पद्धतियों और तकनीकी नवाचारों को अपनाना बेहद जरूरी है।
कृषि को बनेगा समृद्धि का आधार
सीएम ने इस बात पर चिंता जताई कि वर्तमान में प्रदेश के केवल 20-30% किसान ही वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाते हैं। “हमें यह स्थिति बदलनी होगी। वैज्ञानिकों को अपनी खोजों को खेतों तक ले जाना होगा और सीधे किसानों को उनके लाभ समझाने होंगे,” उन्होंने कहा।
योगी ने कहा कि कृषि प्रदेश में सबसे बड़ा रोजगारदाता है और इसके बाद एमएसएमई का स्थान है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, जिसमें कृषि प्रमुख भूमिका निभाएगी।
लक्ष्य तय करना होगा
सीएम ने कहा कि दीर्घकालिक, मध्यकालिक और अल्पकालिक लक्ष्यों को तय करके ही बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। “सिर्फ 2047 का लक्ष्य लोगों को नहीं जोड़ेगा। हमें 2030, 2035 जैसे छोटे पड़ाव भी तय करने होंगे,” उन्होंने कहा।
जलवायु परिवर्तन पर चेतावनी
योगी ने कृषि वैज्ञानिकों से अपील की कि वे अनुसंधान को प्रदेश की जलवायु परिस्थितियों के अनुसार ढालें। “जो तकनीक यूरोप के मौसम के लिए सही है, वह भारत के लिए जरूरी नहीं कि अनुकूल हो,” उन्होंने कहा।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कई कृषि वैज्ञानिकों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्य मंत्री (बागवानी) दिनेश प्रताप सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।