नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने वाले महीनों में चावल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों और वैश्विक एजेंसियों के अनुसार उत्पादन में गिरावट, बढ़ती खपत, मौसम संबंधी जोखिम और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक चावल बाजार पर दबाव बढ़ रहा है।
रिसर्च एजेंसी BMI, जो फिच सॉल्यूशंस की इकाई है, ने कहा है कि 2026 के दौरान चावल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। एजेंसी के अनुसार वैश्विक बाजार में चावल की औसत कीमत 11.7 डॉलर से 12.5 डॉलर प्रति cwt (45.36 किलोग्राम) के बीच रह सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका-ईरान तनाव के चलते उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा मौसम संबंधी जोखिम भी उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे बाजार में सप्लाई दबाव में आ सकती है।
अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026-27 (सितंबर-अगस्त) में वैश्विक चावल उत्पादन में लगभग 50 लाख टन की गिरावट का अनुमान है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025-26 में 537.8 मिलियन टन उत्पादन के मुकाबले अगले सीजन में उत्पादन कम रह सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि पिछले एक दशक से अधिक समय बाद वैश्विक चावल बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन घाटे की ओर बढ़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ वैश्विक खपत में करीब 3.8 मिलियन टन की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
मौसम परिवर्तन, सूखा, अनियमित बारिश और बढ़ती कृषि लागत भी चावल उत्पादक देशों के लिए बड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं। यदि उर्वरकों की कीमतों में और वृद्धि होती है, तो इसका असर उत्पादन लागत पर पड़ेगा और निर्यातक देशों में कीमतें बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई देशों, विशेषकर भारत, थाईलैंड और वियतनाम जैसे प्रमुख निर्यातकों की भूमिका आने वाले समय में और महत्वपूर्ण होगी। भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, इसलिए वैश्विक बाजार की नजर भारतीय उत्पादन और निर्यात नीति पर बनी रहेगी।