पंजाब में पराली जलाने को नई दिल्ली में खतरनाक एयर क्वालिटी के लिए मुख्य कारण माना जाता है, लेकिन पिछले साल की तुलना में इस साल राज्य में पराली जलाने की घटनाओं में 71.37 प्रतिशत की कमी आई है। यह आंकड़े पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सोमवार को लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान सांसद गद्दीगौदर पर्वतगौड़ा चंदनगौड़ा (कर्नाटक) और डॉ. किरसन नामदेव (महाराष्ट्र) के एक प्रश्न के उत्तर में दिए।
संसद में जवाब में दिए गए आंकड़ों से पता चला है कि पंजाब में इस साल केवल 9,655 “पराली जलाने की घटनाएं” दर्ज की गईं, जबकि पिछले साल 15 सितंबर से 18 नवंबर के बीच इसी अवधि के दौरान 33,719 घटनाएं हुई थीं। 2022 में पराली जलाने के आंकड़ों की तुलना में यह कमी 80 प्रतिशत से अधिक है, जब कुल 44,489 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं।
दिल्ली के पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी खेतों में आग लगने की घटनाओं की संख्या 2022 में 3,088 से घटकर इस साल 1,118 रह गई है। 2023 में ये 2,052 थी। वहीं, उत्तर प्रदेश में यह संख्या 2022 में 72 से बढ़कर इस साल 192 हो गई है, जो करीब 66 फीसदी है।
संसद में स्पष्ट कहा गया है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और डेमोलिशन से निकलने वाली धूल, सड़क और खुले क्षेत्रों की धूल, बायोमास जलाना, नगरपालिका के ठोस कचरे को जलाना, लैंडफिल में आग से होने वाले वायु प्रदूषण आदि का मिलाजुला नतीजा है।
इस प्रदूषण के कारण दिल्ली में एयर क्वालिटी इंडेक्स “गंभीर” और “बहुत खराब” श्रेणियों के बीच दर्ज किया जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को शाम 4 बजे तक दर्ज किया गया शहर का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 318 (बहुत खराब) था, जो पिछले दिन दर्ज की गई गंभीर श्रेणी 412 से बेहतर है।