आजमगढ़ में दि किसान सहकारी चीनी मिल बुधवार को भोर में लगभग चार बजे गन्ने के अभाव में बंद हो गई। अभी 14 घंटे ही चीनी मिल चल पाई थी। अब चीनी मिल नो केन की हालत में आ गई। शुरुआती दौर में जब यह हाल है तो अभी पूरा पेराई सत्र बाकी है।
चीनी मिल प्रबंधन अपनी व्यवस्था को लेकर पूरी तरह से संतुष्ट हैं कि सफलतापूर्वक नए पेराई सत्र में गन्ने का अभाव नहीं होने दिया जाएगा। इसे देखते हुए बीते 29 नवंबर को चीनी मिल के पेराई सत्र का शुभारंभ कर दिया गया। चीनी मिल चलने लगी तो ऐसा लगा कि इस बार लगातार मिल चल कर अपना लक्ष्य पूरा करेगी। किसान पर्याप्त मात्रा में गन्ने की आपूर्ति करेंगे। सच बात यह है कि शुभारंभ के बाद चार दिनों में लगभग 10 हजार क्विंटल ही गन्ना का स्टाॅक हो पाया।
सहकारी चीनी मिल सठियांव के प्रबंधन के मुताबिक, नवीन सत्र में 45 लाख क्विटंल गन्ना पेराई का लक्ष्य रखा गया है। पिछले पेराई सत्र का 16296 किसानों को 96.77 करोड़ का भुगतान कर दिया गया है।
मिली जानकारी अनुसार चीनी मिल सठियांव पर गन्ना किसानों का 14 करोड़ रुपये बकाया है, बावजूद नये पेराई सत्र की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। नवंबर में नया सत्र शुरू हो सकता है। पिछले साल 28 नवंबर से पेराई कार्य शुरू हुआ था। 19 मार्च 2024 को समापन हुआ। इस दौरान किसानों द्वारा आपूर्ति किए गए गन्ने का 19 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित है। चीनी मिल प्रबंधन केवल 5 करोड़ 55 लाख रुपये के भुगतान की बात कह रहा है, इससे अभी भी 14 करोड़ रुपये किसानों के बकाया रह जाएंगे।
चीनी मिल सठियांव में आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, वाराणसी और गाजीपुर के गन्ना किसान अपनी उपज की आपूर्ति करते हैं। पिछले सत्र में 30 लाख 23 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई की गई थी, इसकी कीमत 109 करोड़ 27 लाख रुपये आंकी गई थी। मिल प्रबंधन ने गन्ना किसानों को कई किस्तों में भुगतान किया है, 19 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। चीनी मिल प्रबंधन नये सत्र में गन्ने की कम आवक का अंदेशा है, जबकि किसानों का कहना है कि पहले बकाये का भुगतान किया जाना चाहिए।