पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि इस बार राज्य में धान की रोपाई पिछले वर्ष की तुलना में पहले शुरू होगी। जहां पिछले साल रोपाई 11 जून से शुरू हुई थी, वहीं इस बार इसे 1 जून से शुरू करने की बात कही गई। हालांकि, अब तक राज्य के कृषि विभाग ने इस संबंध में कोई अधिसूचना जारी नहीं की है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) के विशेषज्ञों के साथ कई बैठकें की हैं, जिसमें धान की रोपाई की तारीख और इससे जुड़ी संभावित चुनौतियों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने समय से पहले धान की रोपाई को लेकर चेतावनी दी है कि यह राज्य के जल संकट को और गंभीर कर सकता है और भूजल स्तर में तेजी से गिरावट ला सकता है।
भूजल संरक्षण कानून के तहत तय की जाती हैं तारीखें
2009 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित भूजल संरक्षण अधिनियम के बाद से PAU लगातार 10 जून के बाद ही धान की रोपाई करने की सिफारिश करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई 15 से पहले छोटी अवधि वाली धान की किस्में, विशेष रूप से PR 126, बोने वाले किसानों को अक्टूबर में नमी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा।
कृषि निदेशक जसबंत सिंह ने कहा:
“1 जून से रोपाई शुरू करने संबंधी अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है क्योंकि यह मामला विचाराधीन है। इस विषय पर PAU विशेषज्ञों और भूजल संरक्षण से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठकें चल रही हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग राज्य में अत्यधिक पानी की खपत करने वाली ‘पुसा-44’ किस्म के बीजों की बिक्री पर निगरानी रखेगा, जिसे पंजाब में कभी भी किसी प्राधिकरण द्वारा अनुशंसित नहीं किया गया है।
धान रोपाई के लिए चार जोन में बांटा राज्य
सरकार ने इस बार राज्य को चार ज़ोन में बांटा है और प्राथमिकता उन जिलों को दी है, जहां नहरों से पर्याप्त पानी की आपूर्ति होती है। मुख्यमंत्री मान ने 29 मार्च को इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा था कि रोपाई की तारीख आगे बढ़ाने का मकसद किसानों को धान की पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त समय देना है। पहले किसानों के पास धान की कटाई और अगली फसल की बुवाई के बीच बहुत कम समय बचता था।
पिछले साल का शेड्यूल
पिछले साल छह जिलों—मुक्तसर, फरीदकोट, बठिंडा, मानसा, फाजिल्का और फिरोजपुर—में 11 जून से धान की रोपाई शुरू हुई थी। जबकि शेष 17 जिलों—मोगा, संगरूर, मलोट, बरनाला, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब, मोहाली, रूपनगर, लुधियाना, कपूरथला, जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर, तरनतारन, अमृतसर, पठानकोट और गुरदासपुर—में यह प्रक्रिया 20 जून से शुरू हुई थी।
PAU ने पिछले साल 18 से 24 जून के बीच धान की रोपाई का सुझाव दिया था, लेकिन सरकार ने इसे एक सप्ताह पहले कर दिया।
मुख्य बिंदु:
•1 जून से धान रोपाई पर सरकार की अधिसूचना लंबित।
•विशेषज्ञों ने समय से पहले रोपाई को लेकर जताई चिंता।
•जल संकट गहराने और भूजल गिरावट का खतरा।
•सरकार का मकसद—पराली प्रबंधन और किसानों को बेहतर समय देना।
•पुसा-44 जैसी किस्मों की बिक्री पर निगरानी।