उत्तर प्रदेश के शहद उद्योग को नई तकनीक और वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए एपीडा (APEDA) और न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ, बाराबंकी और रायबरेली के प्रमुख शहद उत्पादक क्षेत्रों का व्यापक भ्रमण किया। यह दौरा एपीडा और न्यूजीलैंड सरकार के बीच कृषि एवं शहद उत्पादकता साझेदारी कार्यक्रम के अंतर्गत किया गया।
निदेशक उद्यान श्री बी.पी. राम ने बताया कि न्यूजीलैंड कृषि मंत्रालय के मैनेजर ट्रेड प्लान इम्प्लीमेंटेशन श्री एशन जयवर्धने तथा एपीडा के श्री संदीप साहा ने तीनों जिलों में शहद उत्पादन, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग से जुड़े तंत्र का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया।
बाराबंकी और लखनऊ में प्रोसेसिंग यूनिटों का निरीक्षण
प्रतिनिधिमंडल ने बाराबंकी के देवा रोड स्थित फतेहपुर रजौली गांव में मधुमक्खी पालक निमित सिंह द्वारा संचालित उत्पादन एवं एक्सपोर्ट यूनिट का निरीक्षण किया। दल ने किसानों का समूह बनाकर उन्हें शहद निर्यात से जोड़ने के उनके प्रयासों की सराहना की।
इसके बाद टीम ने लखनऊ के गोसाईगंज क्षेत्र में मधुमक्खी पालक बृजेश कुमार वर्मा की प्रोसेसिंग यूनिट का निरीक्षण किया। उनकी इकाई कई स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय मधुमक्खी पालकों को जोड़कर शहद की प्रोसेसिंग और विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
रायबरेली में हनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का अवलोकन
दौरे के क्रम में प्रतिनिधिमंडल ने राजकीय औद्यानिक प्रक्षेत्र, शिवगढ़ (रायबरेली) स्थित निर्माणाधीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर हनी का निरीक्षण किया। साथ ही, प्रक्षेत्र की हाईटेक नर्सरी में उन्नत पौध उत्पादन प्रक्रियाओं का भी अवलोकन किया गया।
मधुमक्खी पालकों से संवाद और चुनौतियों पर चर्चा
निरीक्षण के बाद टीम ने मधुमक्खी पालकों, संग्राहकों और निर्यातकों से संवाद स्थापित किया। इस दौरान शहद उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर व्यापक चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने तकनीकी सुधार और निर्यात संवर्धन की संभावनाओं पर सकारात्मक रुख व्यक्त किया।
उपस्थित अधिकारी और विशेषज्ञ
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक उद्यान डॉ. सर्वेश कुमार, उप निदेशक उद्यान लखनऊ डॉ. देवेश कुमार वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी डॉ. जय राम वर्मा, कीट विज्ञान विशेषज्ञ सचिन आर्या, मधुमक्खी पालक निमित सिंह (बाराबंकी) एवं बृजेश वर्मा (गोसाईंगंज), तथा हाईटेक नर्सरी प्रभारी नरेन्द्र प्रताप सहित कई वरिष्ठ विशेषज्ञ और किसान उपस्थित रहे।