बिहार में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य की सभी 243 सीटों पर चुनाव अक्टूबर–नवंबर 2025 में कराए जाने की संभावना है। चुनाव का आयोजन भारत निर्वाचन आयोग द्वारा किया जाएगा। पिछला विधानसभा चुनाव वर्ष 2020 में इन्हीं महीनों में संपन्न हुआ था, जिसमें राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने सत्ता हासिल की थी और नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने थे।

हालांकि, अगस्त 2022 में नीतीश कुमार ने अपनी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) को एनडीए से अलग कर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और अन्य दलों के साथ मिलकर महागठबंधन सरकार बनाई। इसके बाद जनवरी 2024 में उन्होंने राजद से रिश्ता तोड़कर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए में वापस शामिल होकर सत्ता में बने रहे।

इसी बीच चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अगस्त 2024 में ऐलान किया कि उनकी पार्टी ‘जन सुराज’ राज्य की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कम से कम 40 सीटों पर महिला प्रत्याशियों को टिकट दिया जाएगा। ऐसे में इस बार का चुनावी मुकाबला काफी अहम और निर्णायक साबित हो सकता है।

राज्य के जातीय समीकरण की बात करें तो पिछड़ा वर्ग 30–35%, अति पिछड़ा वर्ग 20–22%, दलित और महादलित 15–16% तथा सवर्ण जातियां 15% के करीब हैं। मुस्लिम मतदाता 16–17% के आसपास हैं। जानकारों का मानना है कि बिहार की राजनीति में जो भी पार्टी इन जातीय समूहों के बीच सही तालमेल बैठाती है, उसकी सरकार बनाने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है।