बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के मतदान से पहले सियासी तापमान चरम पर है। बुधवार को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) द्वारा लगाए गए ‘वंशवादी राजनीति’ (dynasty politics) के आरोपों पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आलोचक कांग्रेस के संस्थापक पीढ़ियों द्वारा किए गए ऐतिहासिक बलिदानों और योगदानों को नज़रअंदाज़ करते हैं।
प्रियंका गांधी बुधवार को पश्चिम चंपारण के वाल्मीकि नगर में चुनावी रैली को संबोधित करने पहुंचीं। उन्होंने कहा, “जिन्होंने देश की आज़ादी और लोकतंत्र के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर किया, उनकी संतानों को वंशवाद कहकर बदनाम करना गलत है। यह परंपरा नहीं, जिम्मेदारी है।”
पहले चरण का मतदान 4 नवंबर को, दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोटिंग
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए प्रचार मंगलवार (4 नवंबर) की शाम 6 बजे समाप्त हुआ। इस चरण में 121 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा, जबकि दूसरे चरण में शेष 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।
एनडीए और महागठबंधन के बीच सीधी टक्कर
राज्य में इस बार मुकाबला मुख्य रूप से सत्तारूढ़ भाजपा-जदयू गठबंधन (NDA) और विपक्षी महागठबंधन (RJD-कांग्रेस) के बीच है।
तेजस्वी यादव महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, जबकि एनडीए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 20 साल के शासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 साल की केंद्र सरकार के विकास कार्यों पर वोट मांग रहा है।
प्रचार के आखिरी दिन दिग्गजों की रैलियों की बौछार
पहले चरण के मतदान से पहले प्रचार का अंतिम दिन बेहद व्यस्त रहा।
•प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला कार्यकर्ताओं से संवाद किया।
•गृह मंत्री अमित शाह ने तीन जनसभाएँ कीं।
•रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पाँच रैलियाँ कीं।
•भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने रोड शो और जनसभा की।
•मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कई सभाओं को संबोधित किया।
वहीं विपक्षी खेमे से राहुल गांधी ने तीन सभाएँ कीं और तेजस्वी यादव ने पूरे दिन दर्जनों रैलियाँ कीं।
अन्य प्रमुख नेताओं में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी प्रचार किया।
अन्य दलों की मौजूदगी भी अहम
मुख्य मुकाबले के अलावा, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम (AIMIM) भी चुनावी मैदान में हैं, जो कई सीटों पर मुकाबला दिलचस्प बना सकती हैं।
बिहार में इस बार का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि विकास, रोज़गार, प्रवासन और सुशासन जैसे मुद्दों पर जनादेश का परीक्षण भी माना जा रहा है।