बढ़ती मांग और नीलामी केंद्रों पर बढ़ी आवक ने इलायची (Cardamom) सेक्टर में नई रौनक ला दी है। इडुक्की जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्र में इस समय फसल की तुड़ाई (harvest) ज़ोरों पर है, और व्यापारिक हलचल पूरे उफान पर है।
मई से अक्टूबर तक लगातार बारिश के कारण उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है, लेकिन खेती के क्षेत्र में बढ़ोतरी और निवेश में सुधार की वजह से इस सीजन में आवक में इज़ाफा हुआ है। इलायची उत्पादक एस.बी. प्रभाकर के अनुसार, इस साल उत्पादन 32,000 से 34,000 टन के बीच रहने की संभावना है। दिसंबर तक चलने वाली उत्तर-पूर्व मानसून की वर्षा से देर की फसल को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
मौजूदा स्थिति को देखते हुए, इलायची की कीमतें अगले 3 से 4 महीनों तक ₹2,400 से ₹2,700 प्रति किलोग्राम के दायरे में रहने की संभावना है। वसंत ऋतु की बारिश आगे की कीमतों की दिशा तय करेगी, लेकिन फिलहाल कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की संभावना नहीं है।
ग्वाटेमाला, जो इलायची का प्रमुख प्रतिस्पर्धी देश है, वहां इस साल उत्पादन मात्र 16,000-20,000 टन रहने का अनुमान है, जबकि सामान्य उत्पादन 45,000 टन तक होता है। पिछले साल के भीषण एल नीनो सूखे से वहां की फसल अब भी पूरी तरह उबर नहीं पाई है।
इस स्थिति के चलते, भारत ने 44 साल बाद (1981-82 के बाद पहली बार) लगातार दो सीजन से ग्वाटेमाला को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे बड़ा इलायची उत्पादक देश बन गया है। वैश्विक आपूर्ति में कमी से भारत के लिए निर्यात के बड़े अवसर बने हैं।
ईकोस्पाइस के जोसेफ सेबेस्टियन के अनुसार, “नीलामी केंद्रों पर रिकॉर्ड आवक के साथ घरेलू और निर्यात मांग दोनों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी जा रही है। ग्वाटेमाला की सीमित रिकवरी के कारण भारत का इलायची बाजार आने वाले महीनों में मज़बूत रहेगा।” उन्होंने कहा कि अब भारतीय किसान स्टॉक को रोककर रणनीतिक रूप से बिक्री कर रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर दाम मिल रहे हैं।
एक्सपोर्टर एस.के.एम. धनावंदन ने बताया कि रामज़ान 2026 और गुलफूड 2026 (जनवरी) के लिए बुकिंग तेज़ी से चल रही है। खाड़ी देशों से मांग विशेष रूप से 6-7 मिमी, 7-8 मिमी और 8 मिमी (सुपीरियर ग्रेड) इलायची के लिए अधिक है। हालांकि इस सीजन में छोटे आकार की कैप्सूल की कमी है, जिससे आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन पैदा हुआ है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए प्रीमियम ग्रेड इलायची के औसत निर्यात मूल्य ($28-30 प्रति किलोग्राम) में थोड़ी रणनीतिक कटौती करनी चाहिए, जिससे बड़े सौदे सुनिश्चित हो सकें।