सहकारिता विभाग के आयुक्त एवं निबंधक योगेश कुमार एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। आरोप है कि उन्होंने विभागीय मुख्यालय चौधरी चरण सिंह सहकारिता भवन (पीसीयू) के पंचम तल पर बिना किसी शासकीय स्वीकृति और बजटीय प्रावधान के अपने लिए आलिशान कार्यालय कक्ष का निर्माण करवाना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि इसके लिए आर्थिक रूप से कमजोर सहकारी संस्थाओं पर अनुचित दबाव डाला गया।

अधिकारियों–कर्मचारियों में गहरा रोष

योगेश कुमार की कार्यशैली और व्यवहार को लेकर विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि आयुक्त अक्सर अभद्र और अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हैं। उनके कथित बयानों में “तुम चोर हो”, “तुम्हें उल्टा टांग दूंगा” जैसी बातें शामिल हैं। इतना ही नहीं, एक कर्मचारी के रंग पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप लगा है।

पूर्व में भी 20 अगस्त 2025 को उनकी कार्यशैली से नाराज होकर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय आयुक्त ने खेद जताते हुए व्यवहार सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि उनके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। इसी वजह से अब 19 सितंबर को दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

सहकारिता विभाग की संवेदनशीलता

गौरतलब है कि सहकारिता विभाग राज्य और केंद्र सरकार दोनों की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। यह विभाग ग्रामीण किसानों और गरीब तबकों को संस्थागत वित्त और अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाता है। इसी वर्ष संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है।

ऐसे महत्वपूर्ण विभाग में परंपरागत रूप से वरिष्ठ और अनुभवी प्रमुख सचिव या अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी ही नियुक्त किए जाते रहे हैं। लेकिन इस बार अपेक्षाकृत कनिष्ठ अधिकारी, विशेष सचिव स्तर के योगेश कुमार की नियुक्ति ने भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुराने विवाद भी आए सामने

यह पहला अवसर नहीं है जब योगेश कुमार विवादों में फंसे हों। वर्ष 2017 में अमेठी के जिलाधिकारी रहते हुए भी उनकी कार्यशैली और व्यवहार को लेकर गंभीर आपत्तियां उठी थीं। अब सहकारिता विभाग में एक बार फिर उनके खिलाफ विरोध तेज हो रहा है।