3 सितंबर 2025 को हुई 56वीं जीएसटी काउंसिल बैठक में सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में कराधान को सरल बनाने के लिए अधिकांश खाद्य वस्तुओं को 5% या शून्य कर स्लैब में लाने का निर्णय लिया। इस कदम से कारोबारियों के लिए पारदर्शिता, एकरूपता और अनुपालन में आसानी होगी, वहीं उपभोक्ताओं को भी मूल्य राहत मिलेगी। पराठा, परोट्टा और रोटी जैसे घरेलू प्रमुख खाद्य पदार्थों को जीएसटी से मुक्त करने का फैसला इसका उदाहरण है।
सरकार देश में खाद्य सुरक्षा और वहनीयता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) जैसी योजनाओं के माध्यम से 81.35 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराती है। इसके अलावा, मूल्य स्थिरीकरण कोष और ‘भारत दाल’ व ‘भारत चावल’ जैसी सब्सिडी योजनाओं से आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम नियंत्रित किए जाते हैं।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को लाभ
जीएसटी दर 5% या शून्य करने से किसानों, सहकारी समितियों, एमएसएमई, खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों सभी को लाभ होगा:
•डेयरी और स्नैक उत्पादों पर घरेलू खर्च कम होगा।
•खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, दुग्ध सहकारी समितियों और निजी डेयरियों को बढ़ावा मिलेगा।
•अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बढ़ेगी, जिससे क्षेत्रीय ब्रांड और एमएसएमई को सहायता मिलेगी।
•बड़े कन्फेक्शनरी संयंत्रों और छोटे पैमाने के उत्पादकों दोनों को राहत मिलेगी।
•इनपुट लागत घटने से उत्पादन वॉल्यूम बढ़ेगा।
पैकेजिंग सामग्री पर राहत
पैकिंग पेपर, पैकिंग केस और क्रेट्स पर जीएसटी 5% कर दिया गया है।
•इससे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और छोटे निर्माताओं को पैकेजिंग लागत में सीधी राहत मिलेगी।
•उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी।
लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र को गति
वाणिज्यिक माल वाहनों (ट्रक, डिलीवरी वैन आदि) पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दिया गया है।
•इससे ट्रकों की पूंजीगत लागत कम होगी और प्रति टन-किमी मालभाड़ा दरों में कमी आएगी।
•कृषि उत्पाद, सीमेंट, स्टील, एफएमसीजी और ई-कॉमर्स डिलीवरी जैसी वस्तुओं के परिवहन खर्च कम होंगे।
•इससे महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
•एमएसएमई ट्रक मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा।
•कम लॉजिस्टिक लागत से भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में स्थिति मजबूत होगी।
•यह सुधार पीएम गति शक्ति और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति के उद्देश्यों को भी सहारा देंगे।
इसके अलावा, माल वाहनों के तृतीय पक्ष बीमा पर जीएसटी 12% से घटाकर 5% (आईटीसी सहित) करने से भी लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।