भारत की प्रतिष्ठित डेयरी ब्रांड अमूल ने एक और वैश्विक उपलब्धि हासिल की है। इंटरनेशनल कोऑपरेटिव एलायंस (ICA) द्वारा जारी वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर 2025 रिपोर्ट में गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GCMMF) को प्रति व्यक्ति जीडीपी प्रदर्शन के आधार पर दुनिया का नंबर एक सहकारी संगठन घोषित किया गया है। यह रिपोर्ट मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में आयोजित ICA CM50 कॉन्फ्रेंस में जारी की गई।

यह रैंकिंग अमूल के निरंतर विकास, नवाचार और “लोग-प्रथम” दृष्टिकोण को दर्शाती है, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में भी अपनी पहचान बनाए रखने में सफल रहा है।

किसानों के नेतृत्व में सफलता की मिसाल

GCMMF के प्रबंध निदेशक जयेन मेहता ने कहा,

“अमूल पूरी तरह किसानों के स्वामित्व वाला ब्रांड है। दूध संग्रह से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक हर स्तर पर किसान ही इसकी रीढ़ हैं। हमारा प्रभाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी गहरा है — हम गरीबी उन्मूलन, लैंगिक समानता और सतत विकास जैसे संयुक्त राष्ट्र के कई सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को साकार कर रहे हैं। अमूल की असली मुद्रा दूध नहीं, बल्कि ‘विश्वास’ है — करोड़ों उत्पादकों और अरबों उपभोक्ताओं का विश्वास।”

उन्होंने कहा कि ICA की यह मान्यता भारत के सहकारी आंदोलन की ताकत और हमारे संस्थापकों की दूरदर्शी सोच का प्रमाण है, जिन्होंने सामूहिक उद्यम के जरिए समृद्धि का सपना देखा था।

सहकारिता को मिला वैश्विक मंच

दोहा में आज संयुक्त राष्ट्र के दूसरे सामाजिक शिखर सम्मेलन (UN Social Summit 2025) में विश्व नेताओं ने यह स्वीकार किया कि सहकारी संस्थाएं गरीबी उन्मूलन, सामाजिक समावेशन, रोजगार सृजन और सामाजिक परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

सम्मेलन के दौरान “इंटरनेशनल ईयर ऑफ कोऑपरेटिव्स 2025” को औपचारिक रूप से समाप्त किया गया और यह संकल्प लिया गया कि हर दस वर्ष में एक बार अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया जाएगा।

भारत के लिए यह गौरव का क्षण है, जब अमूल जैसे किसान-आधारित मॉडल ने विश्व पटल पर भारतीय सहकारिता आंदोलन की शक्ति और विश्वसनीयता को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया है।