भारत के सरकारी गोदामों में चावल और गेहूं के भंडार नए रिकॉर्ड बना रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 सितंबर तक सरकारी गोदामों में चावल का भंडार (अनमिल्ड धान सहित) सालाना आधार पर 14% से अधिक बढ़कर 48.2 मिलियन मीट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। वहीं गेहूं का भंडार 33.3 मिलियन मीट्रिक टन हो गया है, जो पिछले चार वर्षों का उच्चतम स्तर है।

सरकार के पास चावल का लक्ष्य 13.5 मिलियन टन और गेहूं का 27.6 मिलियन टन था, जिसे दोनों ही मामलों में काफी पीछे छोड़ दिया गया है।

चावल निर्यात को बढ़ावा

भारत, जो दुनिया के चावल का लगभग 40% आपूर्ति करता है, ने मार्च 2025 में अपने अंतिम निर्यात प्रतिबंध भी हटा दिए थे। राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार, 2025 में चावल का निर्यात लगभग 25% बढ़कर 22.5 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है।
हालांकि, नए धान की फसल अगले महीने आने वाली है, जिससे सरकारी एजेंसियों को भंडारण चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

गेहूं का मजबूत बफर

पिछले तीन वर्षों से घटते गेहूं के भंडार की चिंताओं के बाद, अब पर्याप्त भंडार सरकार को बाजार में अनाज छोड़कर दाम स्थिर करने का अवसर दे रहा है। विशेषकर दशहरा और दिवाली जैसे त्यौहारों के समय भारत में गेहूं की मांग चरम पर होती है।

एक मुंबई स्थित ट्रेडर ने कहा,
“अब सरकार के पास पर्याप्त गेहूं भंडार है, जिससे वह उत्सव के मौसम में खुले बाजार में बिक्री कर कीमतों को नियंत्रित कर सकती है।”

भारत के इन रिकॉर्ड भंडारों को किसानों से बढ़ी हुई खरीद और पिछले साल की बंपर फसल से जोड़ा जा रहा है।