नई दिल्ली: देश में संभावित एल नीनो के मद्देनज़र खाद्य सुरक्षा को मजबूत करते हुए सरकार ने बफर स्टॉक के लिए चावल की खरीद में बढ़ोतरी की है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) के माध्यम से अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच केंद्रीय पूल के लिए 42.95 मिलियन टन (एमटी) चावल की खरीद की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 41.41 एमटी की तुलना में 3.7 प्रतिशत अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खरीद सत्र के पहले चार महीनों में यह मजबूत खरीद किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त है, खासकर ऐसे समय में जब मानसून के बाद एल नीनो के उभरने की संभावना जताई जा रही है। एल नीनो की स्थिति आमतौर पर भारत में सूखे या लंबे शुष्क काल का कारण बनती है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होता है।
हालांकि, विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सरकार के सामने अब अधिशेष चावल भंडार के निपटान की चुनौती बनी हुई है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) की वार्षिक आवश्यकता से लगातार अधिक खरीद के बावजूद सरकार अभी तक अधिशेष स्टॉक के लिए कोई स्थायी ऑफ-टेक नीति तैयार नहीं कर पाई है।
फिलहाल अपनाई गई अस्थायी व्यवस्था के तहत चावल के एक हिस्से को एथेनॉल उत्पादन की ओर मोड़ने का प्रयास किया गया था, लेकिन इसका नकारात्मक असर गन्ना क्षेत्र पर पड़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, एथेनॉल खरीद में कमी के कारण इस वर्ष गन्ना किसानों के बकाया भुगतान (केन एरियर) फिर से उभर आए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते खाद्यान्न भंडार और बदलते जलवायु जोखिमों के बीच सरकार को दीर्घकालिक और संतुलित नीति की आवश्यकता है, ताकि खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ किसानों और संबंधित कृषि क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।