कृषि मंत्रालय ने आलू उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत देते हुए केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआइ) शिमला द्वारा विकसित चार नई किस्मों को मंजूरी दे दी है। इनमें कुफरी रतन, कुफरी चिपभारत-1, कुफरी चिपभारत-2 और कुफरी तेजस शामिल हैं। इन किस्मों से किसानों को उच्च उपज के साथ बेहतर भंडारण क्षमता भी मिलेगी, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
इन किस्मों का बीज 15 राज्यों – हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक में उपलब्ध होगा।
सीपीआरआइ के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि किसानों के लिए आलू उत्पादन में नई दिशा खोलेगी। संस्थान अब तक 80 किस्में विकसित कर चुका है। संस्थान की स्थापना 1949 में हुई थी और 1952 में पहली किस्म कुफरी किसान विकसित की गई थी।
किस्मों की विशेषताएं
•कुफरी रतन – 90 दिन में तैयार, 37–39 टन प्रति हेक्टेयर उपज, लाल छिलके वाली खाने योग्य किस्म।
•कुफरी तेजस – ताप सहनशील, 90 दिन में तैयार, 37–40 टन प्रति हेक्टेयर उपज, सफेद क्रीम रंग के अंडाकार कंद।
•कुफरी चिपभारत-1 – 100 दिन में तैयार, 35–38 टन प्रति हेक्टेयर उपज, चिप्स प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त, सफेद क्रीम रंग के गोल कंद।
•कुफरी चिपभारत-2 – 90 दिन में तैयार, 35–37 टन प्रति हेक्टेयर उपज, चिप्स प्रसंस्करण के लिए उपयुक्त, सफेद क्रीम रंग के अंडाकार कंद।
सीपीआरआइ के प्रमुख सामाजिक विज्ञानी डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि ये किस्में किसानों को जलवायु-अनुकूल विकल्प और उच्च उत्पादकता के साथ कृषि आय बढ़ाने का बेहतरीन साधन प्रदान करेंगी।