पंजाब सरकार ने किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए बड़े स्तर पर पहल शुरू की है। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियन ने गुरुवार को बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 15,000 फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) मशीनें मंज़ूर की हैं, जिनमें से 12,500 मशीनें पहले ही किसानों द्वारा खरीदी जा चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, मल्चर, रोटावेटर सहित विभिन्न प्रकार की फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी किसानों को उपलब्ध करा रही है। राज्य में अब तक 1.48 लाख सीआरएम मशीनें किसानों को वितरित की जा चुकी हैं।
खुडियन ने बताया कि धान की पराली प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। इसके तहत गांव-गांव में शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें किसानों को पराली न जलाने और पर्यावरण, वायु गुणवत्ता व मिट्टी की सेहत पर इसके दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष पराली जलाने की घटनाओं में 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। 2024 में राज्य में 10,909 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि 2023 में यह संख्या 36,663 थी। पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना अक्टूबर-नवंबर के दौरान दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का प्रमुख कारण माना जाता है।
राज्य में पहले भी बड़े पैमाने पर पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं – 2022 में 49,922, 2021 में 71,304, 2020 में 76,590, 2019 में 55,210 और 2018 में 50,590 मामले दर्ज किए गए थे। संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर जैसे जिले पराली जलाने के मामले में सबसे आगे रहे हैं।
खुडियन ने कहा कि राज्य सरकार सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने और फसल अवशेष के सही प्रबंधन के लिए लगातार काम कर रही है।