रायबरेली के कलेक्ट्रेट स्थित बचत भवन में आयोजित ज़िला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (DISHA) की उच्च स्तरीय बैठक में गुरुवार (11 सितंबर 2025) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। यह बैठक केंद्र सरकार की योजनाओं की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी।
बैठक के सह-अध्यक्ष एवं अमेठी के सांसद किशोरी लाल शर्मा ने बताया कि मंत्री दिनेश प्रताप सिंह अधिकारियों से सीधे सवाल पूछने लगे, जिस पर उन्हें याद दिलाया गया कि बैठक में बोलने से पहले अध्यक्ष की अनुमति लेनी होती है, जैसे लोकसभा में सभी प्रश्न स्पीकर के माध्यम से पूछे जाते हैं।
शर्मा ने कहा, “एक मंत्री को संसदीय शिष्टाचार पता होना चाहिए। मुख्यमंत्री को इस आचरण पर संज्ञान लेना चाहिए। यह मंत्रिमंडलीय अनुशासन के बारे में क्या संदेश देता है?”
इस घटना का वीडियो शुक्रवार (12 सितंबर 2025) को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समर्थकों ने उनके बेटे के राहुल गांधी से हाथ मिलाने की तस्वीर को ट्रोल करने के लिए वायरल किया है।
सिंह ने लिखा, “मेरे बेटे को केवल हाथ नहीं मिलाना चाहिए था बल्कि राहुल गांधी के पैर छूने चाहिए थे, क्योंकि वह मेरे उम्र के हैं। मैं खुद उठकर राहुल गांधी को नमस्कार किया, लेकिन उन्होंने मुझसे हाथ नहीं मिलाया।”
उन्होंने आगे लिखा, “विवाद का अंत हो, चलिए अपनी-अपनी दिशा में आगे बढ़ें।”
इस बीच, बैठक को सपा के निष्कासित विधायक मनोज कुमार पांडेय ने बहिष्कृत किया। वहीं, लालगंज ब्लॉक प्रमुख शिवानी सिंह ने आरोप लगाया कि उनकी गाड़ी को कलेक्ट्रेट परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया, जिसके कारण उन्होंने बैठक में भाग नहीं लिया।
गौरतलब है कि मंत्री सिंह रायबरेली के रहने वाले हैं और पहले कांग्रेस में थे। उन्होंने एक दिन पहले भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन किया था, जिसमें उन्होंने बिहार की एक कांग्रेस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के बारे में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए माफी की मांग की थी।
भाजपा विधायक अदिति सिंह ने इस विवाद पर कहा, “ऐसी बैठकों में सभी निर्वाचित और नामित प्रतिनिधि हिस्सा लेते हैं। राजनीति के लिए साल में 365 दिन हैं, लेकिन विकास कार्यों से जुड़ी इन बैठकों में शालीनता और प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए। यह मंच राजनीति के एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए नहीं है, बल्कि जनता के मुद्दों पर चर्चा के लिए है।”