धान की खेती करने वाले किसानों के लिए चूल्हे से निकलने वाली राख किसी प्राकृतिक खजाने से कम नहीं है। अक्सर लोग इसे बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह राख धान की फसल को मजबूती देने और पैदावार बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

राख में पोटाश, फॉस्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यही कारण है कि राख का खेतों में छिड़काव करने से किसानों को अलग से पोटाश या अन्य महंगी खाद डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

धान की रोपाई को लगभग एक महीना हो चुका है और यह समय फसल की बढ़वार के लिए बेहद अहम होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान इस चरण पर पौधों को संतुलित पोषण दें और सही देखभाल करें, तो पैदावार दोगुनी तक हो सकती है। जिन खेतों में बाली निकलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, वहां राख का उपयोग और भी फायदेमंद है।

राख छिड़कने से पौधों को मज़बूती मिलती है और कीट-पतंगों का प्रकोप भी कम होता है। कृषि अधिकारी भगवती प्रसाद के अनुसार, धान की फसल में तना छेदक और पत्ती झुलसा जैसी समस्याएं आम होती हैं, लेकिन राख के प्रयोग से इन रोगों का असर काफी हद तक घट जाता है। साथ ही राख मिट्टी की नमी बनाए रखती है, जिससे पौधों को लंबे समय तक पानी की कमी का सामना नहीं करना पड़ता।

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