किसानों और भूमि स्वामियों के लिए अच्छी खबर है। यदि आप अपनी कृषि भूमि बेचते हैं और उस बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ (Capital Gains) को दोबारा कृषि भूमि खरीदने में लगाते हैं, तो आप आयकर से पूरी तरह छूट पा सकते हैं। यह सुविधा आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 54B के अंतर्गत दी जाती है।
धारा 54B क्या है?
आयकर अधिनियम की धारा 54B के अनुसार, व्यक्तिगत करदाता या हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) अपनी कृषि भूमि बेचने पर प्राप्त पूंजीगत लाभ पर कर से छूट प्राप्त कर सकते हैं, यदि वे उस लाभ को दोबारा कृषि भूमि खरीदने में निवेश करते हैं।
यह छूट तभी मिलेगी जब:
•बेची गई भूमि कम से कम दो वर्ष तक कृषि कार्य के लिए प्रयोग की गई हो।
•नई कृषि भूमि बिक्री की तारीख से 2 वर्षों के भीतर खरीदी जाए।
छूट की राशि कैसे तय होगी?
धारा 54B के अंतर्गत कर छूट निम्न में से कम राशि पर मिलेगी:
1.बेची गई भूमि पर हुए पूंजीगत लाभ की राशि; या
2.नई कृषि भूमि में किया गया निवेश (जिसमें पूंजीगत लाभ खाता योजना – Capital Gains Deposit Account Scheme – में जमा राशि भी शामिल है)।
पूंजीगत लाभ खाता योजना (CGAS) का उपयोग
यदि रिटर्न दाखिल करने की तारीख तक नई कृषि भूमि नहीं खरीदी गई है, तो पूंजीगत लाभ की राशि को Capital Gains Deposit Account Scheme (CGAS) में जमा कर सकते हैं। इस खाते से पैसे निकालकर 2 साल की अवधि में नई कृषि भूमि खरीदी जा सकती है।
छूट कब वापस हो जाएगी?
यदि नई खरीदी गई कृषि भूमि को खरीदने के 3 साल के भीतर बेच दिया जाता है, तो पहले मिली कर छूट वापस ले ली जाएगी।
इसी तरह, यदि पूंजीगत लाभ खाता योजना में जमा राशि को 2 साल की समय सीमा में उपयोग नहीं किया गया, तो वह राशि उस साल की दीर्घकालिक पूंजीगत आय (LTCG) मानी जाएगी।
निष्कर्ष
कृषि भूमि की बिक्री से प्राप्त पूंजीगत लाभ को नई कृषि भूमि में निवेश करने पर, धारा 54B के तहत करदाताओं को पूरी तरह टैक्स छूट मिल सकती है। यह किसानों और भूमि स्वामियों के लिए टैक्स बचाने का बेहतरीन अवसर है।