चंडीगढ़: पंजाब में नेशनल फ़ूड सिक्योरिटी एंड न्यूट्रिशन मिशन (NFSNM) के तहत मिलने वाले बरसीम, मसूर, चना और गेहूं के बीजों की अत्यधिक देरी से हुई आपूर्ति ने पूरे कृषि तंत्र को उलझन में डाल दिया है। ये बीज बाढ़ प्रभावित गांवों को मुफ्त और अन्य किसानों को सब्सिडी पर देने थे, लेकिन सभी फसलों की बुवाई अवधि समाप्त होने के बाद ही राज्य में पहुंच रहे हैं, जिसके चलते किसान भी नहीं ले रहे और जिला कृषि अधिकारी भी असमंजस में हैं।
बीज पहुंचे, लेकिन बुवाई का समय निकल चुका
पंजाब सरकार ने केंद्र से उच्च उत्पादकता वाली बीज किस्मों की मांग की थी, ताकि किसान आगे के सीजन के लिए इन्हें बढ़ा सकें। लेकिन:
•बरसीम की बुवाई: 15 सितंबर – 10 अक्टूबर
•मसूर व चना की बुवाई: अक्टूबर-अंत से 15 नवंबर तक
•गेहूं की बुवाई: 1 नवंबर – 15 नवंबर
इसके बावजूद, कृषि विभाग ने मध्य नवंबर में ही बीज जिलों को भेजने शुरू किए, जब तक लगभग पूरे पंजाब में बुवाई का काम पूरा हो चुका था।
राज्य को:
•12,500 क्विंटल बरसीम बीज
•5,000 क्विंटल मसूर बीज
•कई हजार क्विंटल गेहूं व चना के बीज
मिले हैं, जिन्हें अब जिलों को किसी भी तरह बेचकर पैसा जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
जिला अधिकारी परेशान—“बीज वापस भी नहीं कर सकते”
एक मुख्य कृषि अधिकारी (मालवा क्षेत्र) ने कहा:
“हमने अक्टूबर की शुरुआत में ही गेहूं, मसूर और चना बीज की मांग भेज दी थी। विभाग ने ध्यान ही नहीं दिया। अब जब लगभग पूरी बुवाई हो चुकी है, तो बीज भेजकर हमें बेचने का दबाव बना रहे हैं…”
एक अधिकारी (माझा क्षेत्र) बोले:
“बीज की खपत की कोई जगह नहीं बची। मुफ्त वाले बीज भी हम वितरित नहीं कर पा रहे।”
दस्तावेजों के अनुसार, राज्य ने 23 अक्टूबर को बरसीम बीज की मांग भेजी—लेकिन तब तक किसान पहली कटाई तक पहुंच चुके थे।
ऊपर से दबाव—नीचे जमीन पर मांग शून्य
अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बीज निगम और राज्य कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार कॉल करके बीज बेचने और तुरंत राशि जमा करने का दबाव बना रहे हैं। लेकिन:
•किसान बीज नहीं ले रहे
•बुवाई का समय निकल चुका
•बाढ़ प्रभावित गांव भी बुवाई पूरी कर चुके
एक अधिकारी (दोआबा क्षेत्र) ने कहा:
“बीज एक बार जिले में आ जाए, तो वापस नहीं किया जा सकता। बेचो या विभागीय जांच झेलो— यही कहा जा रहा है। किसानों को क्या बेचें, जब वो बरसीम की पहली कटाई कर रहे हैं?”
“हर साल यही समस्या”—वरिष्ठ अधिकारी
लुधियाना के एक वरिष्ठ कृषि अधिकारी ने कहा:
“हर साल योजनाओं के तहत मिलने वाली सामग्री 2–3 महीने देर से आती है। किसान अपने सीजन में देरी नहीं कर सकते। इस तरह देरी होने से योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।”
एक अन्य अधिकारी ने इसे “खराब योजना” और “जिला अधिकारियों पर अनुचित दबाव” बताया।
मंत्री से प्रतिक्रिया का इंतजार
पंजाब कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियन एक कार्यक्रम में व्यस्त होने के कारण उपलब्ध नहीं हो सके। कार्यक्रम के बाद उनके बयान की अपेक्षा की जा रही है।