नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट में सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए एक स्पष्ट निवेश-आधारित विकास रणनीति अपनाई है, जिसमें उच्च-मूल्य (High-Value) कृषि जिंसों की वैल्यू-चेन पर विशेष ध्यान दिया गया है। इस बजट की प्रमुख विशेषता यह है कि उत्पादकता बढ़ाने, ब्रांडिंग और एफपीओ (Farmer Producer Organisations) के माध्यम से संगठित प्रतिस्पर्धी पहलों को प्राथमिकता दी गई है।

पिछले बजटों में जहां बागवानी उत्पादन पर ज़ोर था—जो अब खाद्यान्न उत्पादन से आगे निकल चुका है—वहीं इस बजट में विशिष्ट उच्च-मूल्य फसलों और उप-क्षेत्रों को लक्ष्य बनाकर योजनाएं तैयार की गई हैं। उल्लेखनीय है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित खर्च में कोई उल्लेखनीय वृद्धि नहीं की गई है, जो यह दर्शाता है कि सरकार का फोकस अब उपभोग आधारित सहायता से हटकर निवेश के ज़रिये विकास पर है।

उच्च-मूल्य वैल्यू-चेन पर फोकस

बजट में मछलीपालन और पशुपालन जैसे तेज़ी से बढ़ते कृषि उप-क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके अंतर्गत 500 ‘अमृत सरोवर’, मत्स्य एवं पशुपालन एफपीओ और इंटीग्रेटेड लाइवस्टॉक वैल्यू-चेन को बढ़ावा देने की योजना है।

इसके अलावा नारियल, चंदन और काजू जैसी उच्च-मूल्य फसलों को विशेष रूप से लक्षित किया गया है। बादाम, अखरोट और पाइन नट्स की हाई-डेंसिटी खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय काजू और कोको को 2030 तक वैश्विक ब्रांड के रूप में विकसित किया जाए। नारियल किसानों को पुनः रोपण (Re-plantation) और तकनीकी परामर्श सहायता भी प्रदान की जाएगी।

एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में एआई-समर्थित एग्री-स्टैक की शुरुआत की जा रही है, जो फसलों के लिए कस्टमाइज़्ड एडवाइजरी उपलब्ध कराएगा और सभी वैल्यू-चेन पहलों को तकनीकी सहयोग देगा।

बजट आंकड़ों की तस्वीर

कुल कृषि बजट को ₹1,23,089 करोड़ से बढ़ाकर ₹1,30,561.38 करोड़ कर दिया गया है, जो कि संशोधित बजट FY 2025-26 की तुलना में 6.07 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि बीमा, सिंचाई और ब्याज अनुदान जैसी प्रमुख योजनाओं में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है।

प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण योजना (PM-AASHA) के तहत दालों, तिलहनों और कोपरा के लिए मूल्य समर्थन को ₹7,200 करोड़ किया गया है, जो 3.7 प्रतिशत की वृद्धि है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) के तहत DBT सहायता ₹63,500 करोड़ पर स्थिर रखी गई है।

10,000 एफपीओ गठन एवं संवर्धन योजना के लिए ₹500 करोड़, जबकि एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के लिए ₹910 करोड़ का प्रावधान जारी रखा गया है।

तकनीक और नवाचार को बढ़ावा

नवाचार और तकनीक अपनाने के लिए बजट आवंटन बढ़ाकर ₹200 करोड़ कर दिया गया है।
सबसे बड़ा बदलाव NAMO ड्रोन दीदी योजना में देखने को मिला है, जिसका बजट ₹100 करोड़ से बढ़ाकर ₹676.85 करोड़ कर दिया गया है।

इसके अलावा:

  • भारत-VISTAAR योजना: ₹150 करोड़
  • हाई वैल्यू एग्रीकल्चर सहायता: ₹350 करोड़
  • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY): 22% वृद्धि के साथ ₹8,550 करोड़
  • कृषोन्नति योजना (MIDH और SMAM सहित): 64% वृद्धि के साथ ₹11,200 करोड़

निवेश-आधारित विकास की दिशा

माइक्रो-इरिगेशन, कृषि मशीनीकरण और विकेन्द्रीकृत पोस्ट-हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को RKVY और कृषोन्नति योजना के माध्यम से विशेष बढ़ावा दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि DBT और MSP जैसे उपभोग-आधारित खर्च में वृद्धि न होना, और इसके बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर, उत्पादकता और उच्च-मूल्य उत्पादन पर ज़ोर देना, इस बजट को दीर्घकालिक विकासोन्मुख बनाता है।

कुल मिलाकर, बजट FY 2026-27 भारतीय कृषि को मूल्य-श्रृंखला आधारित, तकनीक-संचालित और निवेश-आधारित विकास की दिशा में ले जाने वाला बजट माना जा रहा है।