उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा कर टाउनशिप बसाने के चलन पर सख्त रोक लगाने का निर्णय लिया है। अब किसी भी विकास प्राधिकरण को टाउनशिप का नक्शा पास करने से पहले राजस्व विभाग के मानचित्र से भूमि का मिलान अनिवार्य रूप से करना होगा। यदि परियोजना की सीमा में ग्राम समाज, शासकीय या स्थानीय निकाय की भूमि आती है और उसका समायोजन नहीं हुआ है, तो नक्शा पास नहीं किया जाएगा।

शासन ने सभी विकास प्राधिकरणों को इस संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि टाउनशिप नीति-2022 और राजस्व विभाग की अगस्त 2023 की अधिसूचना के अनुसार भूमि का समायोजन सुनिश्चित किए बिना कोई भी नक्शा स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

अब जरूरी होगा राजस्व विभाग का ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’

टाउनशिप का नक्शा अब तभी पास होगा, जब राजस्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त होगा। विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने अभिलेखों में राजस्व विभाग का सुपर-इंपोज्ड नक्शा अनिवार्य रूप से रखें, जिसमें परियोजना की भूमि का खसरा नंबर और वास्तविक स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

नक्शा स्वीकृति प्रक्रिया के दौरान सभी संबंधित विभागों — राजस्व, आवास, नगर विकास और पर्यावरण — से एनओसी प्राप्त करना आवश्यक होगा।

धोखाधड़ी पर लगेगा अंकुश, खरीदारों की परेशानी होगी कम

शासन का मानना है कि अब तक कई परियोजनाओं में बिना समायोजन और धोखाधड़ी से नक्शे पास कराए गए, जिससे बाद में विवाद उत्पन्न हुए और टाउनशिप अधर में फंस गईं। इससे फ्लैट खरीदारों और आवंटियों को वर्षों तक संपत्ति का कब्जा पाने के लिए इंतजार करना पड़ा।

अब नए निर्देशों के तहत, रेरा (RERA) में पंजीकरण की स्थिति भी नक्शा पास करने से पहले जांची जाएगी। बिना रेरा पंजीकरण के कोई भी टाउनशिप नक्शा स्वीकृत नहीं किया जाएगा।

एफएआर और अन्य नियमों का पालन भी अनिवार्य

शासन ने कहा है कि रेलवे अथॉरिटी या अन्य संस्थानों द्वारा प्रस्तुत आवासीय या व्यावसायिक परियोजनाओं में यदि कोई कमी पाई जाती है, तो उसकी स्पष्ट टिप्पणी उपविधियों में दर्ज की जाएगी। एफएआर (Floor Area Ratio) और अन्य सेवा शर्तों की स्थिति भी स्पष्ट करनी होगी।

सरकार का यह कदम न केवल भूमि घोटालों पर अंकुश लगाएगा, बल्कि आवास क्षेत्र में पारदर्शिता और खरीदारों के अधिकारों की रक्षा भी सुनिश्चित करेगा।