योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2025 महिलाओं के सशक्तिकरण और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित हुआ है। प्रदेश में महिलाओं के जीवन में आया बदलाव अब केवल नीतिगत दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। सुरक्षा से लेकर आत्मनिर्भरता और सम्मान तक, उत्तर प्रदेश ने महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत मॉडल प्रस्तुत किया है।

पिछले एक वर्ष के दौरान महिलाओं, किशोरियों और बालिकाओं के जीवन में व्यापक परिवर्तन दर्ज किए गए हैं। यह बदलाव केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सुरक्षा, अवसर, शिक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के नए रास्ते खोलने वाला साबित हुआ है।

‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना के तहत इस वर्ष 13,612 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 25.5 लाख महिलाओं और बालिकाओं तक सीधा संदेश पहुंचा। इस पहल ने बेटियों के जन्म के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने, बाल लिंगानुपात सुधारने और उच्च शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता के साथ एक सामाजिक क्रांति का रूप लिया है।

‘मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना’ ने भी बड़ी संख्या में परिवारों को राहत दी है। इस वर्ष 3.28 लाख बालिकाओं को ₹130.03 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक छह चरणों में मिलने वाली सहायता ने बेटियों की पढ़ाई सुनिश्चित की और समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण बदला।

निर्वासित एवं बेसहारा महिलाओं के लिए निराश्रित महिला पेंशन योजना सहारा बनी है। वर्तमान में 38.58 लाख महिलाएं नियमित पेंशन का लाभ ले रही हैं। इस वर्ष लगभग ₹1,200 करोड़ खर्च किए गए, जबकि अनुपूरक बजट में लगभग ₹535 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर प्रणाली ने पारदर्शिता भी सुनिश्चित की है।

हिंसा से पीड़ित महिलाओं को राहत देने के लिए रानी लक्ष्मीबाई बाल एवं महिला सम्मान कोष के माध्यम से इस वर्ष 3,519 पीड़िताओं को लगभग ₹116.36 करोड़ की सहायता दी गई।

मिशन शक्ति अपने पांचवें चरण में पहुंच चुका है और राज्यभर में लगभग नौ करोड़ लोगों को महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं और कानूनों के बारे में जागरूक किया गया है। 28 विभागों की संयुक्त भागीदारी के साथ “हक की बात जिलाधिकारी के साथ” और “स्वावलंबन कैंप” जैसी पहलें महिलाओं को प्रशासन से सीधे जोड़ रही हैं।

महिला न्याय एवं सुरक्षा तंत्र भी सुदृढ़ हुआ है। प्रदेश में 75 से अधिक वन-स्टॉप सेंटर कार्यरत हैं, जहां चिकित्सा, कानूनी परामर्श और पुलिस सहायता एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा रही है। इस वर्ष 24,671 महिलाओं को इनसे लाभ मिला। 181 महिला हेल्पलाइन ने भी 56,507 मामलों में त्वरित सहायता प्रदान की।

कामकाजी एवं निराश्रित महिलाओं के लिए आवास सुविधाओं का दायरा भी बढ़ाया गया है। ‘माता अहिल्याबाई होल्कर श्रमजीवी महिला हॉस्टल योजना’ के तहत सात जिलों में 500-500 क्षमता वाले हॉस्टल निर्माणाधीन हैं। इसके अतिरिक्त लखनऊ, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में आठ श्रमजीवी महिला छात्रावास बनाए जा रहे हैं।
मथुरा स्थित कृष्णा कुटीर जैसे बड़े आश्रय गृहों ने हजारों महिलाओं को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराया है।

कुल मिलाकर, वर्ष 2025 में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के क्षेत्र में यूपी मॉडल राष्ट्रीय स्तर पर एक उदाहरण के रूप में सामने आया है।