अमेरिका ने 200 से अधिक कृषि उत्पादों पर व्यापक टैरिफ छूट की घोषणा की है और स्विट्ज़रलैंड के साथ एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया है। ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस कदम से अमेरिका का प्रभावी टैरिफ दर 0.6 प्रतिशत अंक घटकर 12.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

हालांकि 2026 में अमेरिकी महंगाई पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा—केवल 4 बेसिस पॉइंट की कमी—लेकिन यह निर्णय एशिया के उभरते बाजारों के लिए व्यापारिक अवसरों को नया आकार दे सकता है।

खाद्य उत्पादों पर बड़ी राहत

अमेरिका की यह छूट मुख्य रूप से बीफ, कॉफी, केले और नट्स जैसे प्रमुख खाद्य उत्पादों पर केंद्रित है, जिन पर पहले 50% तक आयात शुल्क लगता था।
2026 के मिड-टर्म चुनावों से पहले बढ़ती खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अमेरिका में निम्न आय वर्ग खाद्य मुद्रास्फीति से सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, इसलिए यह निर्णय राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है।

भारत और ब्राज़ील को बड़ा फायदा

रिपोर्ट में भारत और ब्राज़ील को उन देशों के रूप में चुना गया है जिन्हें निकट भविष्य में टैरिफ कटौती से सबसे अधिक लाभ मिल सकता है।

  • भारत से चाय, मसाले और समुद्री उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की संभावना है।

  • भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार तनाव अब कम होने के संकेत दे रहे हैं।

  • राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया एशिया यात्रा के दौरान अमेरिका-ब्राज़ील व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत मिले हैं।

एशिया के लिए नए अवसर

भारत के साथ-साथ एशिया के अन्य निर्यातक देश—विशेष रूप से कॉफी, चाय और प्रोसेस्ड फूड—अमेरिका की नई टैरिफ नीति का लाभ उठा सकते हैं।

यदि वर्तमान टैरिफ दरें पूरी तरह उपभोक्ताओं पर डाली जाएं तो अमेरिका में खाद्य कीमतें लगभग 0.9% तक बढ़ सकती हैं, इसी वजह से सरकार ने यह छूट आवश्यक मानी।

विश्लेषकों का अनुमान है कि अगली छूट लहर में पोल्ट्री और मछली शामिल हो सकते हैं, जिससे दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

 वैश्विक असर

अमेरिका पर इसका सीधा प्रभाव सीमित है, लेकिन स्विट्ज़रलैंड की GDP में 2026 में 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की उम्मीद जताई गई है।

दक्षिण अफ्रीका, चिली और पेरू जैसे कमोडिटी निर्यातक देशों में प्रभावी टैरिफ दर में 4 प्रतिशत अंक तक की कमी देखी जाएगी।

कुल मिलाकर, यह बदलाव एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसके तहत वह बदलती वैश्विक सप्लाई चेन के बीच अमेरिका के साथ व्यापारिक साझेदारी को और मजबूत कर सकता है।