नॉर्वे की उर्वरक दिग्गज कंपनी यारा इंटरनेशनल की भारतीय इकाई यारा साउथ एशिया ने इस वर्ष विशेष (स्पेशलिटी) उर्वरकों के आयात में 25 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई है। कंपनी के अनुसार 2025 में यह आयात 1.35-1.40 लाख टन तक पहुंच सकता है, जबकि पिछले वर्ष यह 1.00-1.20 लाख टन के बीच रहा था।
कंपनी का कहना है कि चीन की ओर से निर्यात पर सख्ती और भारत में बागवानी (Horticulture) फसलों की मांग में तेजी के चलते यह उछाल देखने को मिल रहा है। किसान तेजी से फल और सब्ज़ी जैसी लाभकारी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे विशेष उर्वरकों की खपत बढ़ रही है।
चीन के निर्यात प्रतिबंध और आपूर्ति शृंखला में बदलाव
सॉल्यूबल फर्टिलाइज़र इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार चीन के विशेष उर्वरक निर्यात की अस्थायी बहाली से अल्पकालिक राहत मिली थी, लेकिन अगले माह से बीजिंग द्वारा निरीक्षण और कंसाइनमेंट में देरी के ज़रिए निर्यात नियंत्रण और सख्त किए जाने की संभावना है।
यारा पहले 70-80% विशेष उर्वरक चीन से आयात करती थी, लेकिन कोविड-19 और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी आपूर्ति संकटों के अनुभव के बाद अब उसने आपूर्ति शृंखला (Supply Chain) को विविधीकृत कर लिया है। अब 70% आयात नॉर्वे के अपने संयंत्रों से और शेष 30% मध्य पूर्व (Middle East) के आपूर्तिकर्ताओं से किया जा रहा है।
कंपनी ने बताया कि उसने अपने नॉर्वेजियन संयंत्रों से कैल्शियम नाइट्रेट उत्पादन को बढ़ाया है और मध्य पूर्व से सल्फेट ऑफ पोटाश और पोटेशियम नाइट्रेट जैसे उत्पाद लिए जा रहे हैं। इससे आपूर्ति शृंखला लंबी हुई है और कार्यशील पूंजी की जरूरत बढ़ी है, लेकिन पिछले छह माह से भारतीय किसानों को स्थिर कीमतों पर उर्वरक उपलब्ध कराए गए हैं।
बाजार की मजबूती और किसान संपर्क
कंपनी का लक्ष्य वर्तमान वित्त वर्ष में अपनी गैर-रियायती (Non-subsidised) विशेष उर्वरक श्रेणी में 15-20 प्रतिशत वृद्धि का है। पिछले वित्त वर्ष में यारा इंडिया का कुल राजस्व ₹5,342 करोड़ रहा था।
कंपनी ने कहा कि वह किसानों से सीधे जुड़ाव के लिए इस साल 40,000-50,000 किसान बैठकों और 4,000-5,000 प्रदर्शन कार्यक्रमों के ज़रिए अपने यारा क्रॉप प्रोग्राम की ताकत दिखा रही है।
नई चुनौतियां और अवसर
वैश्विक स्तर पर मोनो-अमोनियम फॉस्फेट (MAP) की कमी एक चुनौती बनकर उभरी है। यह उर्वरक अब इलेक्ट्रिक वाहन (EV) बैटरी के उत्पादन में भी इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे आपूर्ति बाधित हुई है। हालांकि, यारा ने रणनीतिक योजना और वैकल्पिक स्रोतों के ज़रिए इस चुनौती को काफी हद तक टाल लिया है।
भारत में वर्तमान में वाटर-सॉल्यूबल फर्टिलाइज़र का उत्पादन शुरू करने की कोई योजना नहीं है, लेकिन कंपनी मेक इन इंडिया (Make in India) कार्यक्रम के तहत माइक्रोन्यूट्रिएंट उत्पादन संयंत्र स्थापित करने पर विचार कर रही है। इससे न केवल भारत बल्कि वैश्विक बाजारों के लिए भी निर्यात किया जा सकेगा। हालांकि, नियामकीय बाधाएं (4-5 वर्ष की पंजीकरण देरी) इस योजना के क्रियान्वयन में बड़ा अवरोध हैं।
उत्पादन और निवेश पर कंपनी की रणनीति
यारा ने अपने बाबराला स्थित 1.3 मिलियन टन क्षमता वाले यूरिया उत्पादन संयंत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार की संभावना को नकारते हुए परिचालन दक्षता सुधार पर ध्यान केंद्रित किया है। साथ ही, कंपनी ने चीन में भारत-निर्देशित वाटर-सॉल्यूबल फर्टिलाइज़र उत्पादन संयंत्र की योजना भी भू-राजनीतिक कारणों से स्थगित कर दी है।
कंपनी के अनुसार भारत की 80% आयात-निर्भरता के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से सब्सिडी भुगतान में कोई देरी नहीं हुई है। इससे कार्यशील पूंजी में स्थिरता बनी है और समय पर विशेष उर्वरक आयात करने में मदद मिल रही है।
भविष्य की दिशा
यारा साउथ एशिया का लक्ष्य है कि वह 2026 तक भारतीय व्यवसाय को तीन गुना करे, जिसके लिए 8-9 प्रतिशत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का अनुमान लगाया गया है। कंपनी ने कहा कि उसका विशेष उर्वरक कारोबार ही सतत विकास का मुख्य क्षेत्र रहेगा और किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक समय पर उपलब्ध कराए जाएंगे।