घर पर कई ऐसे फल हैं, जिनके पेड़ आसानी से लगाए जा सकते हैं। उनमें अमरूद का पेड़ शामिल है, जिसे आप गमले में भी लगा सकते हैं। हरे-पीले अमरूद खाने का आनंद लोगों को अक्सर लेते देखा होगा, लेकिन अगर ये अपने ही गार्डन का हो, तो मजा दोगुना हो जाता है। अमरूद का पेड़ आसानी से भले ही लग जाता है, लेकिन अन्य पेड़-पौधों की तरह उसकी देखरेख सही तरीके से ना की जाए तो जल्दी मुरझा भी जाते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोगों की चाहत होती है कि गार्डन में लगा अमरूद का पेड़ अधिक फल दें|

फरवरी-मार्च या अगस्त-सितंबर का महीना अमरूद के पौधे लगाने के लिए सही माना जाता है।

पौधे में सिंचाई शरद ऋतु में 15 दिन के अंतर पर तथा गर्मियों में 7 दिन के अंतर पर करते रहना चाहिए। जब कि फल देने वाले पौधे से फल लेने के समय को ध्यान में रखकर सिंचाई करनी चाहिए। उदहारण के लिए बरसात में फसल लेने के लिए गर्मी में सिंचाई की जाती है। जब कि सर्दी में अधिक फल लेने के लिए गर्मी में सिंचाई नहीं करनी चाहिए।

पौधों की मजबूती और सही वृद्धि के लिए कटाई और छंटाई की जरूरत होती है। जितना मजबूत बूटे का तना होगा, उतनी ही पैदावार अधिक अच्छी गुणवत्ता भरपूर होगी। बूटे की उपजाई क्षमता बनाए रखने के लिए फलों की पहली तुड़ाई के बाद बूटे की हल्की छंटाई करनी जरूरी है। जब कि सूख चुकी और बीमारी आदि से प्रभावित टहनियों की कटाई लगातार करनी चाहिए। बूटे की कटाई हमेशा नीचे से ऊपर की तरफ करनी चाहिए। अमरूद के बूटे को फूल, टहनियां और तने की स्थिति के अनुसार पड़ते हैं इसलिए साल में एक बार पौधे की हल्की छंटाई करने के समय टहनियों के ऊपर वाले हिस्से को 10 सैं.मी. तक काट देना चाहिए। इस तरह कटाई के बाद नईं टहनियां अकुंरन में सहायता मिलती है।