महाराष्ट्र के कोल्हापुर की रहने वाली मोनिका मोहिते ने यह साबित कर दिया है कि अगर नीयत साफ हो और मेहनत सच्ची, तो खेती भी करोड़ों का व्यवसाय बन सकती है। अंग्रेज़ी साहित्य और कंप्यूटर साइंस में पढ़ाई करने वाली मोनिका ने जब खेती की राह चुनी, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वो जैविक खेती (ऑर्गेनिक फार्मिंग) के क्षेत्र में इतनी बड़ी मिसाल बन जाएंगी।
आज उनका “पारखी ऑर्गेनिक फार्म्स” करीब 40 एकड़ में फैला हुआ है और सालाना ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक का कारोबार कर रहा है।
क्यों चुनी खेती की राह?
साल 2008 में मोनिका के बेटे ने रेसिंग करियर की शुरुआत की। एक डाइटिशियन की सलाह पर जब मोनिका ने बाजार में मिलने वाले सप्लीमेंट्स और एनर्जी फूड देखे, तो उन्हें उनकी गुणवत्ता पर शक हुआ। एक मां के तौर पर उन्होंने फैसला लिया – अगर शुद्ध और ताकतवर भोजन बाज़ार में नहीं है, तो वो खुद उगाएंगी। यहीं से जन्म हुआ पारखी ऑर्गेनिक फार्म्स का।
क्या खास है पारखी ऑर्गेनिक फार्म्स में?
•यह सिर्फ एक खेत नहीं, एक पूरा इकोसिस्टम है जहां फसलें, दालें, पशुपालन और मुर्गीपालन – सब कुछ साथ में होता है।
•यहां जैविक तरीकों से उगाई जाती हैं सब्जियां, अनाज और फल।
•रसायन मुक्त खेती की वजह से उत्पाद न सिर्फ स्वास्थ्यवर्धक हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं।
‘पारखी’ नाम का भावनात्मक जुड़ाव
मोनिका ने अपने फार्म का नाम “पारखी” रखा, जिसका मतलब होता है – जो असली की पहचान रखता हो।
यह नाम उन्होंने अपनी सास पार्वती और बेटी ख्याति के नाम से प्रेरित होकर रखा है।
उनका कहना है, “आई ने मुझे खेती से जोड़ा, और ये फार्म उनके लिए मेरी तरफ़ से श्रद्धांजलि है।”
किसानों के लिए प्रेरणा बनीं मोनिका
हाल ही में मोनिका मोहिते ग्लोबल फार्मर बिजनेस नेटवर्क (GFBN) से भी जुड़ी हैं, जो कि कृषि जागरण की एक राष्ट्रीय पहल है। इस नेटवर्क का मकसद है – भारत में सस्टेनेबल और सफल कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देना।
क्या सीख सकते हैं दूसरे किसान?
•मोनिका की तरह किसान भी जैविक खेती अपनाकर लागत कम और मुनाफा ज्यादा कर सकते हैं।
•साफ़ सोच और नई तकनीक के साथ खेती को व्यवसायिक मॉडल में बदला जा सकता है।
•पारखी फार्म्स जैसे प्रयास न सिर्फ बाजार को शुद्ध उत्पाद देते हैं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत करते हैं।