केरल व देश के अन्य भागों में काली मिर्च के एक पेड़ से अधिकतम औसत उत्पादन लगभग 5 किलो रहा है।कोंडागांव की मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 में यह औसत उत्पादन मात्रा 8-10 किलो पाई गई है। इस उपलब्धि पर कृषि वैज्ञानिक उम्मीदों से भर गये हैं।
आमतौर पर केरल व देश के अन्य भागों में काली मिर्च के एक पेड़ से अधिकतम औसत उत्पादन 5
किलो रहा है। कोंडागांव की मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16 में यह औसत उत्पादन मात्रा 8-10 किलो है। उत्पादन की मात्रा के साथ-साथ गुणवत्ता में भी यह काली मिर्च अन्य काली मिर्च से बेहतर है। इस आशय का एक लेख भारत सरकार के केन्द्रीय मसाला संस्थान के नवीनतम आधिकारिक प्रकाशन में प्रकाशित हुआ है। उल्लेखनीय है कि, स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की टीम का यह विशेष लेख ’मां दंतेश्वरी हर्बल फार्म्स तथा रिसर्च सेंटर कोंडागांव के लगातार दौरे और प्रत्यक्ष निरीक्षण के बाद, भारत सरकार के ’स्पाइस बोर्ड ऑफ इंडिया’ के आधिकारिक प्रकाशन ’’स्पाइस इंडिया’’ पत्रिका के नवीनतम अंक में प्रकाशित हो चुका है।
अधिक पैदावार वाली काली मिर्च की नई किस्म को लेकर उत्साहित मसाला बोर्ड के सचिव डी साथियान ने कहा, “बोर्ड 2030 तक मसालों के निर्यात में 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य हासिल करने की रणनीति बना रहा है।” वाणिज्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यात बाजारों के विविधीकरण और मसाला क्षेत्र में ब्रांड इंडिया बनाने से भारत को मसालों के निर्यात में अधिक टिकाऊ और लचीला बनाने में मदद मिलेगी।
विश्व में सबसे ज्यादा काली मिर्च का उत्पादन भारत में होता है और भारत में सर्वाधिक काली मिर्च का उत्पादक राज्य केरल है भारत विश्व में काली मिर्च का उत्पादक, उपभोक्ता एवं निर्यातक देशों में प्रमुख है। भारत से प्रतिवर्ष 20 करोड़ रूपए की कालीमिर्च का निर्यात विदेशों को किया जाता है। मुख्य रूप से केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में काली मिर्च की खेती जमकर की जाती है। महाराष्ट्र, कुर्ग, मलावर, कोचीन, त्रावणकोर, और असम के पहाड़ी इलाकों में भी काली मिर्च की खेती की जा रही है। आजकल छत्तीसगढ़ भी काली मिर्च की खेती के लिए चर्चा में है।
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