बांग्लादेश में शेख हसीना के तख्ता पलट के साथ भारत से पड़ोसी बांग्लादेश को होने वाले निर्यात को रोक दिया है। बांग्लादेश को निर्यात में मुख्य रूप से सूती धागा, पेट्रोलियम, अनाज, फल और सब्जियां शामिल हैं। कृषि उत्पादों में चावल, मक्का, चीनी, शीरा, रेपसीड, आलू और प्याज शामिल हैं, जिनका भारत से बांग्लादेश को निर्यात होता है। कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा लगभग 30 से 32 फीसदी होता है।

भारतीय सीमा पर बांग्लादेश जाने वाले ट्रकों की लंबी कतारें और व्यापार में रुकावटें आई हैं। बांग्लादेश भारत का 25वां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।भारत बांग्लादेश को आवश्यक खाद्य वस्तुओं के साथ-साथ कृषि, बिजली और औद्योगिक उपकरण और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करता है। शेख हसीना सरकार के गिरने के बाद अब यह निर्यात बाजार अनिश्चितता के भंवर में घिर सकता है।

गौरतलब है कि बीते साल भारत ने बांग्लादेश को 6,052 वस्तुओं का निर्यात किया, जिसमें मुख्य रूप से साल 2023-24 में प्याज, दाल, मक्का, ताजी सब्जियां, ताजे फल, मूंगफली, डेयरी उत्पाद, चीनी, गुड़, नॉन बासमती चावल, बासमती चावल है। भारत का निर्यात बांग्लादेश को 12.20 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता से निर्यात को लेकर अनिश्चितता का माहौल बनेगा, जिससे निवेशकों के समक्ष बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश ने पिछले कुछ वर्षों में पर्याप्त आर्थिक वृद्धि हासिल की है। भारत से बांग्लादेश को निर्यात में मुख्य रूप से सूती धागा, पेट्रोलियम, अनाज, फल और सब्जियां शामिल हैं। कृषि उत्पादों में चावल, मक्का, चीनी, शीरा, रेपसीड, आलू और प्याज शामिल हैं, जिनका भारत से बांग्लादेश को निर्यात होता है। कृषि उत्पादों का बड़ा हिस्सा लगभग 30 से 32 फीसदी होता है।

भारतीय निर्यातकों का कहना है कि बांग्लादेश में विदेशी मुद्रा की कमी के कारण पहले ही निर्यात में रुकावटें आई हैं। भारत की सीमा पर बांग्लादेश को निर्यात के लिए पहुंचे जल्दी खराब होने वाले सामानों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। एपीडा के अनुसार, साल 23-24 में बांग्लादेश को 1556 करोड़ रुपये का 724,814.05 लाख टन कृषि, फल सब्जियों और डेयरी उत्पाद का निर्यात किया गया था।

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