केंद्र सरकार ने कहा है कि 2025-26 फसल वर्ष में देश का गेहूं उत्पादन स्थानीय स्तर पर हुई बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान के बावजूद “स्थिर और मजबूत” बना हुआ है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, प्रतिकूल मौसम के प्रभावों को किसानों की रणनीतिक तैयारियों और बेहतर कृषि प्रबंधन ने काफी हद तक संतुलित किया है।

रोलर फ्लोर मिलर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (RFFI) ने 24 अप्रैल को गेहूं उत्पादन का अनुमान 110.65 मिलियन टन लगाया है, जो 2024-25 के 109.63 मिलियन टन से थोड़ा अधिक है। हालांकि यह आंकड़ा मंत्रालय के पहले के 120.21 मिलियन टन के अनुमान से कम है।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने दोनों अनुमानों के बीच संतुलन साधते हुए कहा कि वास्तविक उत्पादन 110 से 120 मिलियन टन के बीच रहने की संभावना है।

मौसम और उत्पादन पर असर

फरवरी में असामान्य गर्मी के कारण फसल पर हीट स्ट्रेस पड़ा, जिससे दानों के भरने की अवधि कम हो गई। वहीं, फसल पकने के समय हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कुछ क्षेत्रों में गुणवत्ता और पैदावार प्रभावित हुई।

सकारात्मक कारक बने सहारा

कृषि मंत्रालय ने कई ऐसे कारण गिनाए हैं, जिनसे नुकसान की भरपाई संभव है:

  • इस साल 33.4 मिलियन हेक्टेयर में गेहूं की बुवाई हुई, जो पिछले वर्ष से अधिक है
  • 0.6 मिलियन हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में खेती से उत्पादन बढ़ने की उम्मीद
  • समय पर बुवाई से फसल ने अंतिम चरण की गर्मी से बचाव किया
  • उच्च गुणवत्ता और जलवायु-प्रतिरोधी बीजों का अधिक उपयोग
  • फसल में कीट और रोगों का कोई बड़ा प्रकोप नहीं
  • खरपतवार की समस्या भी कम रही

राज्यों से मिले सकारात्मक संकेत

हरियाणा में गेहूं की आवक सरकार के 75 लाख टन के लक्ष्य से अधिक हो चुकी है, जबकि खरीद 56.13 लाख टन तक पहुंच गई है, जो पिछले साल से लगभग 9 लाख टन अधिक है।

मध्य प्रदेश ने बेहतर उत्पादन के संकेतों के चलते अपना खरीद लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है। वहीं महाराष्ट्र में भी उत्पादन 22.90 लाख टन रहने का अनुमान है और मराठवाड़ा व विदर्भ से अच्छी आवक दर्ज की गई है।