भारत सरकार और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच कृषि, ग्रामीण विकास, खाद्य सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी सहयोग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा। यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बिल गेट्स से मुलाकात के बाद दी।
चौहान ने कहा कि बिल गेट्स और उनकी टीम के साथ कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि गेट्स फाउंडेशन कृषि और ग्रामीण विकास में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करता है और समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
AI और क्लाइमेट-स्मार्ट कृषि पर रहेगा विशेष फोकस
चौहान ने बताया कि इस साझेदारी को खासतौर पर AI-आधारित कृषि, एग्री-फिनटेक और जलवायु अनुकूल तकनीकों के क्षेत्र में गहराया जाएगा। यह सहयोग डिजिटल एग्रीकल्चर, बायोटेक्नोलॉजी और जलवायु-लचीली खेती में गेट्स फाउंडेशन की भारत में पहले से चल रही पहलों पर आधारित है।
भारत की कृषि क्षेत्र की वैश्विक भूमिका
भारत का कृषि क्षेत्र पिछले एक दशक में औसतन 4% से अधिक की वार्षिक वृद्धि दर बनाए हुए है। जबकि भारत के पास विश्व की केवल 4% कृषि भूमि और मीठे पानी के संसाधन हैं, देश 18% वैश्विक जनसंख्या और 15% मवेशियों की खाद्य जरूरतें पूरी करता है।
भारत मिलेट्स, मसालों, दूध और दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, वहीं चावल, गेहूं, फल और सब्जियों में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
G20 अध्यक्षता के दौरान अहम भूमिका
चौहान ने बताया कि भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान भी गेट्स फाउंडेशन ने कृषि और ग्रामीण विकास मंत्रालयों के साथ मिलकर डिजिटल एग्रीकल्चर और एग्री-क्रेडिट में तकनीकी सहयोग दिया था।
“भूखमुक्त, सशक्त और आत्मनिर्भर विश्व की दिशा में प्रयास”
चौहान ने आशा व्यक्त की कि भारत, गेट्स फाउंडेशन और अन्य वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर नवाचार, तकनीक और समावेशी विकास के माध्यम से एक भूखमुक्त और सशक्त दुनिया के निर्माण में अहम योगदान देगा।
उन्होंने यह भी कहा, “हम भारत की सर्वोत्तम कृषि प्रथाओं को दुनिया के साथ साझा करने को उत्सुक हैं और तकनीक के माध्यम से वैश्विक कृषि प्रगति में योगदान देना चाहते हैं।”